February 14, 2026

ध्यान सूत्र-आत्मशांति की ओर एक मार्ग

मानव जीवन की सबसे बड़ी आवश्यकता है- मन की शांति और स्थिरता बाहरी उपलब्धियों के बावजूद यदि भीतर अशांति है तो सुख अधूरा लगता है। ऐसे में ध्यान सूत्र हमारे लिए मार्गदर्शक बनते हैं। ये सूत्र सरल, छोटे और सहज तरीके से मन को वर्तमान क्षण में टिकाना सिखाते हैं।

सबसे पहला सूत्र है — श्वांस पर ध्यान। जब हम श्वास के आने-जाने को सिर्फ देखते हैं, उसे नियंत्रित नहीं करते, तब मन धीरे-धीरे शांत होने लगता है। इसी से जुड़ा है साक्षी भाव, जिसमें व्यक्ति हर विचार, भावना और अनुभूति को केवल घटित होते देखता है, उनसे तादात्म्य नहीं करता।

एक और महत्वपूर्ण सूत्र है- वर्तमान में रहना। अतीत का बोझ और भविष्य की चिंता मन को व्याकुल करती है, जबकि वर्तमान ही जीवन का सत्य है। इसी क्रम में निर्विचार का सूत्र हमें बताता है कि विचारों को रोकने की कोशिश व्यर्थ है, उन्हें आकाश में बादलों की तरह आने-जाने दें।

ध्यान के गहन अनुभव के लिए अद्वैत सूत्र सहायक है- मैं शरीर नहीं, मन नहीं, मैं शुद्ध चेतना हूँ। यह आत्मबोध व्यक्ति को अपने असली स्वरूप से परिचित कराता है। वहीं, कृतज्ञता ध्यान हर क्षण और हर श्वास के लिए आभार प्रकट करना सिखाता है, जिससे मन हल्का और प्रसन्न रहता है। ध्वनि और नाद का प्रयोग करते हुए ? शांति मंत्र का जप भीतर ऊर्जा और संतुलन भरता है। अंतत: मौन सूत्र हमें यह याद दिलाता है कि मौन ही हमारा वास्तविक स्वरूप है, और मौन में डूबकर ही हम सच्ची शांति को अनुभव करते हैं।

इन ध्यान सूत्रों का नियमित अभ्यास हमें न केवल तनावमुक्त करता है, बल्कि जीवन को गहरी चेतना और आत्मबोध की ओर ले जाता है। यही सूत्र आत्मशांति और आनंद का सच्चा मार्ग हैं।