Karwa Chauth 2026 : करवाचौथ एक ऐसा व्रत है, जिसका सबसे ज्यादा नवविवाहित जोड़ों को इंतजार होता है. लेकिन इस बार सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि शुक्र ग्रह अस्त होने और भद्रा के कारण जिनका पहला करवाचौथ है, वो व्रत ना करें, नहीं तो अशुभ होगा. लेकिन ज्योतिषी इन दावों को निराधार बता रहे हैं. ज्योतिषियों का कहना है कि व्रत को लेकर जो धार्मिक ग्रंथ है, उनमें इस तरह की किसी भी बाधा का उल्लेख नहीं है.
करवाचौथ में बाधा, नवविवाहितों के लिए शुभ या अशुभ?
इस वर्ष करवा चौथ का व्रत 29 अक्टूबर, गुरुवार को विशेष शुभ योग में मनाया जाएगा. यह व्रत सभी सुहागिनों के लिए प्रशस्त और फलदायी है. ज्योतिष मठ संस्थान, भोपाल के आचार्य पं. विनोद गौतम बताते हैं, '' इस वर्ष चतुर्थी तिथि सुबह संकल्प काल से रात्रि चंद्रोदय तक कर्मकाल में पूर्ण रूप से विद्यमान रहेगी. कुछ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह भ्रांति फैलाई जा रही है कि इस वर्ष विवाह होने पर पहली बार करवा चौथ नहीं रखा जा सकता. जबकि यह पूर्णतः मिथ्या है. धर्मसिन्धु और निर्णयसिन्धु जैसे धर्मग्रंथों में इस व्रत के लिए किसी प्रकार की बाधा का उल्लेख नहीं है.''
शुक्र अस्त और भद्रा के कारण किया जा रहा है दावा
पं.विनोद गौतम बताते हैं, '' दावा करने वालों का कहना है कि इस साल करवाचौथ के दिन शुक्र ग्रह अस्त रहेंगे और भद्रा के कारण नवविवाहितों के लिए ये अशुभ होगा. लेकिन करवाचौथ के व्रत में किसी प्रकार की बाधा नहीं है. शुक्र का उदय एक दिन पहले 28 अक्टूबर को प्रातःकाल हो जाएगा, इसलिए शुक्र अस्त का दोष नहीं रहेगा. साथ ही इस दिन भद्रा भी नहीं है. सभी माताएं-बहनें यह निर्जल व्रत पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ करें.''
करवाचौथ पर चांद निकलने का समय?
पं. विनोद गौतम के अनुसार, '' करवाचौथ के पर्व पर भू-पृष्ठीय चंद्रमा का उदय रात 8 बजकर 24 मिनिट पर होगा. यही व्रत का कर्मकाल है. शास्त्र अनुसार जब चंद्रमा क्षितिज से थोड़ा ऊपर उठकर लालिमा युक्त और पूर्ण शीतल दिखाई दे, तभी अर्घ्य देकर पूजा करनी चाहिए. हालांकि, शुक्र उदय के कारण आकाश में बादल और बूंदाबांदी के योग बन रहे हैं, जिससे कई शहरों में चंद्र दर्शन में विलंब हो सकता है.''
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करवाचौथ पर इस वर्ष के शुभ संयोग
भले ही करवाचौथ को लेकर अशुभता का दावा किया जा रहा है. लेकिन पंडित विनोद गौतम के अनुसार इस बार करवाचौथ पर रोहिणी और मृगशिरा नक्षत्र का शुभ संयोग व शिवयोग बन रहा है. चंद्रमा अपनी उच्च राशि वृषभ में भ्रमण करेगा, जो दाम्पत्य जीवन में प्रेम और प्रीति बढ़ाने वाला माना गया है. उच्च के चंद्रमा के प्रभाव से पति-पत्नी के बीच वर्ष भर के मनमुटाव समाप्त होते हैं.

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