नई दिल्ली
प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (EAC-PM) के चेयरमैन विवेक देबरॉय ने सिंगल टैक्स स्लैब पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार को जीएसटी के कारण राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि इसे सिंगल रेट के साथ रेवेन्यू न्यूट्रल होना चाहिए। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि जीएसटी से चीजें काफी सुगम हुई हैं।
सिंगल टैक्स स्लैब पर जोर: देबरॉय ने कहा, ''आदर्श जीएसटी वह है जिसमें एक ही स्लैब हो और इसका मकसद रेवेन्यू न्यूट्रल होना था। जब जीएसटी पहली बार लागू किया गया था, तब वित्त मंत्रालय ने कुछ आकलन किया था। उसके तहत रेवेन्यू के लिहाज से न्यूट्रल होने के लिए औसत दर कम से कम 17 प्रतिशत होनी चाहिए थी। लेकिन मौजूदा दर 11.4 प्रतिशत है। जीएसटी की वजह से सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है।''
28 प्रतिशत की दर में कटौती की चाहत: उन्होंने कहा कि जनता के साथ-साथ जीएसटी काउंसिल के सदस्य भी चाहते हैं कि 28 प्रतिशत टैक्स की दर कम हो। लेकिन कोई भी नहीं चाहता कि शून्य और तीन प्रतिशत कर की दरें बढ़ें। देबरॉय ने कहा कि जीएसटी प्रावधानों का दुरुपयोग हो रहा है। हालांकि, उन्होंने इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं बताया।
विवेक देबरॉय ने कहा, “अगर सरकार को खर्च करने की जरूरत है, तो उसे राजस्व की जरूरत है… सकल घरेलू उत्पाद का 10 प्रतिशत स्वास्थ्य और शिक्षा पर, तीन प्रतिशत रक्षा पर और 10 प्रतिशत बुनियादी ढांचे पर खर्च किया जाना चाहिए।'' उन्होंने आगे कहा, ''हालांकि, हम नागरिक के रूप में सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 15 प्रतिशत कर के रूप में चुकाते हैं। इसका मतलब यह है कि हम 15 प्रतिशत कर का भुगतान करते हैं, लेकिन सरकार से हमारी मांग और अपेक्षाएं 23 प्रतिशत की सीमा तक है।''
देबरॉय ने कहा, ''इसीलिए, चाहे हम इसे पसंद करें या नहीं, या तो हमें अधिक कर के भुगतान के लिये तैयार रहना चाहिए या फिर हम यह उम्मीद नहीं कर सकते कि हमें पश्चिमी देशों की तरह हवाई अड्डे मिलेंगे या चीन की तरह रेलवे स्टेशन मिलेंगे।''

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