गब्बर सिंह टैक्स ने किसानों को लूटा, पीएम मोदी करें आत्मावलोकन

अरुण यादव का प्रधानमंत्री को खुला पत्र

भोपाल। पूर्व केंद्रीय मंत्री और मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव ने पीएम नरेन्द्र मोदी को संबोधित एक खुला पत्र लिखकर जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) को किसानों पर बोझ बताने के साथ ही इसे गब्बर सिंह टैक्स करार दिया है। यादव ने कहा कि यह पत्र उन्होंने एक कांग्रेस नेता नहीं, बल्कि एक पीडि़त किसान की हैसियत से लिखा है। उन्होंने सीधे सवाल उठाया कि किसानों से पिछले आठ वर्षों में जीएसटी के नाम पर कितना राजस्व वसूला गया, इसका सरकार को खुलासा करना चाहियेे।

श्रीयादव ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार एक ओर किसानों को मात्र 4-6 हजार रुपये सालाना की राहत का ढोंग करती है, वहीं दूसरी ओर कृषि उपकरण, ट्रैक्टर और रसायनों पर भारी-भरकम जीएसटी लगाकर किसानों की जेब काट लेती है। उन्होंने कहा कि सरकार ने एक हाथ से राहत दी और दूसरे हाथ से गब्बर सिंह टैक्स लगाकर अन्नदाता को बेहिसाब लूटा।

श्री यादव ने 6 सितम्बर 2025 को भोपाल में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की प्रेस कॉन्फ्रेंस का हवाला देते हुए कहा कि मंत्री ने ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों पर जीएसटी दरें कम करने से किसानों को होने वाली बचत की बात कही थी। उन्होंने तर्क दिया कि यदि अब एक ट्रैक्टर पर 32 से 65 हजार रुपये की बचत बताई जा रही है, तो पिछले आठ सालों में खरीदे गए लाखों ट्रैक्टरों पर किसानों से कितना अतिरिक्त जीएसटी वसूला गया? यादव ने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि वर्ष 2024 में देश में कृषि उपकरण और रसायनों का कारोबार 1232.20 अरब रुपये रहा। यदि आठ वर्षों का हिसाब जोड़ा जाए, तो करोड़ों किसानों से जीएसटी के नाम पर अकल्पनीय रकम वसूली गई है। उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार इसका सटीक ब्योरा जारी करे।

श्री यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त को किसानों के समर्थन की बातें की थीं, जिससे किसानों को उम्मीद जगी थी कि 22 सितम्बर के राष्ट्र के नाम संबोधन में राहत की घोषणा होगी। लेकिन यह भाषण “घडय़िाली आंसुओं” से आगे नहीं बढ़ सका और किसानों को निराशा हाथ लगी। उन्होंने आरोप लगाया कि आगामी पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों को देखते हुए किसानों को राहत की उम्मीद थी, लेकिन प्रधानमंत्री ने एक बार फिर विश्वासघात किया।