नर्मदापुरम
वन्य प्राणियों के जीवन की सुरक्षा के लिए पश्चिम मध्य रेलवे रातापानी के जंगल में पहाड़ियों के बीच से निकली रेल लाइन के ऊपर 4 एनीमल ओवरपास बना रहा है। बुदनी से बरखेड़ा के बीच 26 किमी के रेलवे ट्रैक पर 4 ऐसे स्थान हैं जहां से वन्य प्राणियों की टेरेटरी है।
जंगली जानवर शिकार और पहाड़ी नाले में पानी की तलाश के लिए रेलवे ट्रैक पार करते हैं। लेकिन इसी बीच ट्रेन आ जाने पर तेज आवाज के कारण दो पहाडों के बीच में फंस जाते हैं। घबराहट में वे ट्रैक पर दौड़ने लगते हैं और ट्रेन की चपेट में आकर मर जाते हैं। जिन स्थानों पर एनीमल ओवरपास बना रहे हैं वे स्थान वन विभाग ने रेलवे को चिन्हित करके दिए हैं, क्योंकि जंगली जानवर उन्हीं रास्ते अक्सर निकलते हैं। अभी चौका रेलवे स्टेशन (केविन) के पास 2 एनीमल ओवरपास बनकर तैयार हो चुके हैं। वहीं 2 पर काम चल रहा है।
जानकारी के अनुसार पिछले 10 वर्षों में पहाडों के बीच फंसकर 10 तेंदुआ और 9 बाघों की मौत ट्रेन की चपेट आकर हो चुकी है। आवीएनएल के सीपीएम राघवेंद्र सारस्वत ने बताया कि 2 लगभग कंप्लीट हो चुके हैं, 2 पर काम चल रहा है। हमारा लक्ष्य मानसून आने से पूर्व कम्पलीट करने का है।
ईको फ्रेंडली ओवरपास बन रहे
एक ओवरपास का निर्माण लगभग 2 करोड़ रुपए से हो रहा है। 4 एनीमल ओवरपास बुदनी से मिडघाट के बीच 1, चौका- मिडघाट के बीच 2, चौका बरखेड़ा के बीच 1 एनीमल ओवरपास का निर्माण हो रहा है। इसकी चौड़ाई 32 मीटर है जबकि पहाड़ी के बीच गेप 18 मीटर का है। एनीमल ओवरपास जिन स्थानों पर बनाए गए हैं वहां रेलवे ट्रैक के दोनों और 100-100 मीटर की 3.5 मीटर ऊंची चैनलिंग फेंसिंग लगाई जाएगी ताकि वे एनीमल ओवरपास से होकर रेल लाइन का क्रॉस करें। यह ईको फ्रेंडली रहेंगे ताकि जंगली जानवर आसानी से इस पार से उस पास आ जा सकें।
ट्रैक और पहाड़ के बीच 3-5 फीट की दूरी मिडघाट सेक्शन में चौका के पास रेलवे ट्रैक और पहाड़ी के बीच में 3-5 फीट का गेप बचता है। जब ट्रेन गुजरती है तो दोनो ओर ड्रेन बनी होने के कारण वन्य प्राणी दोनों पहाड़ के बीच स्थित ट्रैक भागने लगते हैं और निकल नहीं पाता।

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