नई दिल्ली। दिल्ली में लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों के लिए पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल के घर में हुए नवीनीकरण का काम राहु बन गया है। इस नवीनीकरण में सामने आईं अनियमितताओं के मामले में पूर्व में निलंबत हो चुके पीडब्ल्यूडी के वरिष्ठ अधिकारी अशोक राजदेव पर फिर गाज गिरी, उनकी पदोन्नति रोकी गई है। उनसे कनिष्ठ अधिकारियों को पदोन्नति मिल गई है, मगर इनका प्रमोशन सील बंद लिफाफे में रखा गया है। राजदेव इस मामले में नहीं फंसते तो केंद्रीय लोक निर्माण विभाग में विशेष महानिदेशक होते।
पूर्व सीएम केजरीवाल के आवास मामले में राजदेव समेत अब तक सात अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। उनके खिलाफ सीबीआई और केंद्रीय सतर्कता आयोग की जांच चल रही है। सीएम पद पर रहने के दौरान केजरीवाल के सिविल लाइन स्थित फ्लैग स्टाफ रोड के बंगला नंबर-6 आवास में नवीनीकरण के नाम पर अनियमितता बरती गई थीं। नवीनीकरण काम कराने वाले अधिकारी बेगुनाह होने की दलील देते रहे हैं। अब पीएम की अध्यक्षता में गठित समिति पदोन्नति समिति की हुई बैठक के बाद गत 28 अक्टूबर के आदेश के मुताबिक समिति ने कुल 6 अधिकारियों को पदोन्नति दी है। उन्हें केंद्रीय लोक निर्माण विभाग में विशेष महानिदेशक बनाया है। इनमें एनएन संबासिवा राव, बीएल मीना, मनोज तलरेजा, पीबी सिंह व राजेश खरे के नाम शामिल हैं। इनके बाद राजदेव का नाम छठे नंबर पर था, मगर उनकी पदोन्नति रोक दी गई। इनसे निचले स्तर के दो अधिकारी रामदयाल और नवीन कुमार बंसल को भी पदोन्नत किया है। हालांकि, आदेश में कहा गया है कि राजदेव से निचले स्तर के दोनों अधिकारियों को अडहाक आधार पर पदोन्नति दी है। क्योंकि इस दौरान अगर राजदेव का मामला निपट जाता है तो राजदेव इस पदोन्नति के हकदार होंगे।
इनमें तत्कालीन प्रधान मुख्य अभियंता एके आहूजा, तत्कालीन मुख्य अभियंता (पूर्व मंडल) पीके परमार, प्रधान मुख्य अभियंता अशोक कुमार राजदेव और अधीक्षक अभियंता अभिषेक राज और तत्कालीन कार्यकारी अभियंता (केंद्रीय और नया डिवीजन) के शिबनाथ धारा, कार्यकारी अभियंता विनय चौधरी और सहायक अभियंता रजत कांत को निलंबित दिया गया है। इनमें से राजदेव, राज, चौधरी और कांत अभी सेवा में हैं। अधिकारी दलील देते रहे हैं कि उन्होंने उस समय की सरकार के आदेश पर काम किया है।
केजरीवाल के आवास पर कितना खर्च हुआ
पूर्व सीएम केजरीवाल के सरकारी आवास की शक्ल बदलने पर 44.78 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। सितंबर 2020 से जून, 2022 के बीच 6 बार में राशि खर्च की गई। जबकि इसका टेंडर 8.62 करोड़ रुपए की निविदा लागत पर दिया गया। इसकी अनुमानित लागत 7.61 करोड़ थी। इसे 13.21 फीसदी ज्यादा कर दिया गया था। यह बंगला 1942 में बनाया गया था।

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