भोपाल
वन मण्डल रायसेन अंतर्गत शनिवार को एक यूरेशियन वल्चर (गिद्ध की प्रजाति) को हलाली बांध के पास सफलतापूर्वक मुक्त किया गया। इस वल्चर को सतना वन मण्डल से रेस्क्यू कर मुकुंदपुर रेस्क्यू सेंटर और वन विहार में उपचार के लिये लाया गया था। वल्चर के उपचार के बाद स्वस्थ होने पर उसे रिलीज किया गया।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक श्री राजेश खरे ने बताया कि रायसेन वन मण्डल के सरार बीट में गिद्धों के लिये अनुकूल परिस्थिति, वातावरण और उनकी संख्या को ध्यान में रखते हुए इस स्थान पर वल्चर को छोड़ा गया। उन्होंने बताया कि इसी स्थल पर वल्चर रेस्टोरेंट का निर्माण करने की तैयारी शासन स्तर पर चल रही है। आगामी दिनों में भोपाल स्थित वल्चर ब्रीडिंग सेंटर के 6 वल्चर को भी इसी स्थान पर छोड़ा जायेगा।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री असीम श्रीवास्तव ने कहा कि मवेशियों को इलाज के लिये दी जाने वाली दवाइयाँ, जिन्हें शासन ने प्रतिबंधित किया है और जो गिद्धों के लिये जानलेवा है, के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि डायक्लोफेनेक, निमेसुलाइड, कीटोप्रोफेन और एसेक्लोफेनेक दवाइयाँ जो पशुओं के इलाज के लिये दी जाती थीं, इन दवाइयों को पूर्णत: प्रतिबंधित कर दिया गया है और इनका उपयोग गैर कानूनी भी है। उन्होंने कहा कि गिद्धों की संख्या में जो भारी गिरावट आयी, वह इन्हीं दवाओं के कारण थी। मुख्य वन्य-प्राणी अभिरक्षक श्री शुभरंजन सेन ने बताया कि कर्मचारियों को दवाइयों का एक सैम्पल भी प्रदाय किया है। इन दवाइयों से गिद्धों को कोई नुकसान नहीं होगा।
इस अवसर पर मुख्य वन संरक्षक भोपाल, वन मण्डलाधिकारी रायसेन, विदिशा, उप वन मण्डल अधिकारी रायसेन, विदिशा, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और बीएनएचएस की टीम मौजूद थी।

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