इंदौर /भोपाल
मप्र में कागजों पर उद्योगों के लिए डेढ़ लाख एकड़ जमीन उपलब्ध है लेकिन हकीकत उलट है। प्रदेशभर के औद्योगिक क्षेत्रों की 5-6 हजार एकड़ जमीन अवैध कब्जों से घिरी है। इनमें अवैध कॉलोनियां, गोदाम और व्यावसायिक कब्जे शामिल हैं। नए उद्योगों के लिए जगह ही नहीं मिल पा रही है।
इसे मुक्त करा लिया जाए तो 90 हजार लोगों को रोजगार मिल सकता है, वहीं, 4 से 5 हजार करोड़ निवेश भी आ सकता है। लेकिन, राजनीतिक दखल के चलते ये प्रयास सफल नहीं हो पा रहे। भोपाल में 700 एकड़ में फैले गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र में 180 एकड़ से अधिक अतिक्रमण है।
141 एकड़ जमीन का विवाद एक बिल्डर समूह से हाई कोर्ट में सालों से लंबित है तो 10-15 एकड़ क्षेत्र में 3 झुग्गी बस्तियां बसी हुई हैं। पीथमपुर में ही 50 एकड़ जमीन मुक्त कराई गई है।
इधर, मप्र औद्योगिक विकास निगम के एमडी चंद्रमौलि शुक्ला कहते हैं, भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के औद्योगिक क्षेत्रों में महिला हॉस्टल बन रहे हैं। अवैध कॉलोनियों और झुग्गियों में रह रही महिला श्रमिकों को इनमें बसाया जाएगा।
प्रति एकड़ निवेश टेक्सटाइल में एक करोड़ रुपए प्रति एकड़ से लेकर फार्मा में 6 करोड़ तक निवेश आता है। मल्टी स्टोरी क्लस्टर में 10-12 करोड़ तक है। वहीं, प्रति एकड़ निवेश पर अलग-अलग सेक्टर में 20 से 150 लोगों को नौकरियां मिलती हैं।
15 साल बाद प्रस्ताव पर पहल मंडीदीप इंडस्ट्री एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राजीव अग्रवाल ने कहा, 15 साल पहले हमने पास में खाली पड़ी सरकारी जमीन पर इंडस्ट्रियल टाउनशिप बनाने का प्रस्ताव दिया था ताकि कब्जे न हों और श्रमिकों को आवास मिलें। अब ये पहल हुई है।
श्रमिकों के आवास बनेंगे पीएम आवास योजना के तहत निजी बिल्डरों की मदद से औद्योगिक क्षेत्रों के पास श्रमिकों के लिए अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट और रेंटल प्रोजेक्ट के तहत आवास बनेंगे। -संकेत भोंडवे, आयुक्त नगरीय विकास एवं आवास
किस तरह के अतिक्रमण…
40% गुमठियां, पार्किंग
35% झुग्गी बस्तियां
25% भूखंड धारकों के अवैध निर्माण

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