पटना। राजनीति में जो दिखता है वो होता नहीं है। बिहार विधानसभा चुनाव में कभी कभी लगता है कि भाजपा विरोधी दल एकजुटता से चुनाव लड़ेगे। कभी मतभेद की आहट आती है। इसी बीच कांग्रेस ने बिहार में महाजुटान की पहल की है। राहुल गांधी के नेतृत्व में वोटर अधिकार यात्रा की। उसकी सफलता से गदगद कांग्रेस अब 84 साल बाद पहली बार बिहार में अपनी कार्यसमिति(सीडब्ल्यूसी) की बैठक करने जा रही है। पार्टी 24 सितंबर को पटना में सीडब्ल्यूसी बैठक करने जा रही है। इससे पहले 1940 में पटना में सीडब्ल्यूसी की बैठक हुई थी। पार्टी की इस रणनीति से बिहार कांग्रेस के नेता गदगद हैं और उनका जोश हाई है। पार्टी नेता इसे स्वतंत्रता की दूसरी लड़ाई करार दे रहे हैं। कार्यसमिति की बैठक में शामिल होने के लिये मप्र कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी भी पटना पहुंच गये हैं।
बिहार कांग्रेस के प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ने पत्रकारों से कहा कि बिहार में कांग्रेस स्वतंत्रता की दूसरी लड़ाई लड़ रही है और यही कारण है कि यह बैठक यहां बुलाई गई है। उन्होंने कहा, बिहार अब राष्ट्रीय राजनीति का केंद्र बन गया है। बिहार के लोगों के समर्थन से, हम दूसरे स्वतंत्रता संग्राम की तैयारी कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी और इंडिया गठबंधन बिहार और भारत के लोगों के अधिकारों के लिए लडऩे के लिए तैयार हैं। उन्होंने बताया कि सीडब्ल्यूसी बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी भी मौजूद रहेंगे। इनके अलावा सीडब्ल्यूसी के सभी अन्य सदस्यों को भी आमंत्रित किया गया है।
कार्यसमिति की बैठक में कांग्रेस शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के भी शामिल होने की उम्मीद है। बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश कुमार ने कहा कि सदाकत आश्रम में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक आयोजित होना पार्टी के लिए ऐतिहासिक पल है। उन्होंने कहा, ‘यह हमारे लिए ऐतिहासिक क्षण है कि सदाकत आश्रम सीडब्ल्यूसी की बैठक की मेजबानी कर रहा है, जहां महात्मा गांधी, डॉ. राजेंद्र प्रसाद और जवाहरलाल नेहरू जैसे महान नेताओं ने विचार-विमर्श किया था।

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