इंदौर
रैगिंग की घटना पर लगाम कसने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नियम सख्त कर दिया है। शैक्षणिक संस्थानों को हर महीने एंटी रैगिंग कमेटी (एआरटी) की रिपोर्ट अनिवार्य रूप से भेजने को कहा है। लेकिन कालेज इसमें दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं।
कालेजों ने 2023-24 सत्र में कोई रिपोर्ट नहीं दी। अब देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने लापरवाही बरतने वाले कालेजों को नोटिस भेजा है। जहां प्रबंधन को कालेज में सीनियर-जूनियर के बीच तालमेल और जुड़े विवादों के बारे में पूछा है। पंद्रह दिनों में प्रबंधन को जवाब देना है। उधर विश्वविद्यालय ने कार्रवाई करने की बात कहीं है।
डीएवीवी के दायरे में 280 कालेज
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के दायरे में 280 कालेज आते है, जिसमें 80 प्रतिशत कालेजों ने एंटी रैगिंग कमेटी और एंटी रैगिंग स्क्वाड बनाया है। बीस प्रतिशत कालेजों में अभी तक इनका गठन तक नहीं किया है। विश्वविद्यालय ने कालेजों को नियमित रूप से सीनियर व जूनियर विद्यार्थियों से बात कर समन्वय बनाने पर जोर दिया है। ताकि रैंगिंग जैसी घटनाएं को रोकने में मदद मिल सके।
यहां तक कि विद्यार्थियों की कालेज और होस्टल परिसर में गतिविधियों पर भी नजर रखी जा सके। इन्हीं बातों के बारे में रिपोर्ट में जिक्र करना होता है। यही काम कालेजों की तरफ से नहीं हो रहा है। लगातार कालेज लापरवाही बरतने में लगे है। सत्र शुरू होने के बावजूद कालेजों ने रिपोर्ट नहीं भेजी है। जबकि कमेटी की रिपोर्ट हर महीने विश्वविद्यालय को देना है।
25 नवंबर तक देना है रिपोर्ट
यूजीसी के नियमों का उल्लंघन करने वाले कालेजों पर सख्ती बरतते हुए विश्वविद्यालय ने नोटिस दिया है। अधिकारियों के मुताबिक 25 नवंबर तक कालेजों को कमेटी की रिपोर्ट देना है। निर्धारित तारीख तक रिपोर्ट नहीं भेजने वाले कालेजों पर कार्रवाई की जाएगी।
छात्र कल्याण संघ अध्यक्ष डा. एलके त्रिपाठी का कहना है कि संस्थान में विद्यार्थियों के बीच विवाद, सीनियर-जूनियर में झगड़े जैसे मामलों के बारे में भी कालेजों को बताना होगा। विद्यार्थियों के बीच समन्वय बढ़ाने पर कालेजों को काम करना है।

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