मुख्यमंत्री डॉ यादव ने डायल-112 को दिखाई हरी झंडी, डायल-100 का नाम अब डायल-112 हुआ
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को कुशाभाऊ ठाकरे अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में आयोजित समारोह में डायल-112 को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। प्रदेश में डायल-100 का नाम बदलकर डायल-112 कर दिया गया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा की डायल-112 देश के कदम के साथ कदम मिलाने का काम करेगा। डायल 112 पुलिस की तत्परता बढ़ाने की नई पहल है। यह आपातकालीन नंबर सुरक्षित समाज के ईको सिस्टम का आधार बनेगा। संकट की हर घड़ी में डायल-112 एक कॉल पर पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि अगर कोई गलत काम करता है, तो मेरी ओर से पुलिस को पूरी छूट है, कि वह खुलकर कार्रवाई करे।
कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) कैलाश मकवाना ने कहा कि आज का दिन गौरवशाली है। सेंट्रलाइज्ड मॉनिटरिंग द्वारा डायल 100 ने त्वरित सहायता देने का काम किया है। शुरुआत में एक हजार वाहन लगाए गए थे। कोविड लॉक डाउन में लाखों व्यक्तियों की सहायता डायल 100 ने की है। यह सेवा पांच साल के लिए शुरू की गई थी, लेकिन अलग-अलग कारणों से पांच साल का अतिरिक्त समय लग गया। इस योजना में 1200 वाहनों की डीपीआर जनवरी 2025 में मंजूर हुई थी। श्री मकवाना ने कहा कि डायल 112 के रूप में शुरू हो रही नई योजना 972 करोड़ रुपये की पंचवर्षीय योजना है। इसमें नागरिकों के नम्बर की गोपनीयता बनी रहेगी। एजेंसी और पुलिस स्टाफ को ट्रेनिंग दी जा चुकी है।
नई तकनीक से लैस है नई डायल-112
डायल-112 का नया कॉन्टैक्ट सेंटर शिफ्ट में 100 एजेंट की क्षमता वाला होगा, जिसमें 40 सीटों का डिस्पैच यूनिट है। पीआरआई लाइनों से एसआईपी आधारित ट्रंक लाइन पर माइग्रेशन होगा, ताकि 112 पर कॉल एक्सेस अधिक सहज हो। नागरिकों और एफआरवी के बीच संपर्क को बेहतर बनाते हुए गोपनीयता बनाए रखने के लिए नंबर मास्किंग समाधान। एफआवी के रख-रखाव को ट्रैक करने हेतु समग्र फ्लीट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर। चैटबॉट जैसे नॉन-वॉयस माध्यमों द्वारा नागरिकों से संवाद और शिकायतों की ट्रैकिंग। नागरिकों और पुलिस अधिकारियों के लिए विशेष मोबाइल ऐप्स। पारदर्शिता के लिए एफआरवी में डेशबोर्ड, कैमरा और बॉडी वॉर्न कैमरा की व्यवस्था।
डायल 112- एक ही नंबर पर मिलेगी ये सेवाएं
डायल-112 सेवा शुरू होने के बाद अब पुलिस (100), स्वास्थ्य, एम्बुलेंस (108), अग्रिशमन (101), महिला हेल्पलाइन (1090), सायबर क्राइम (1930), रेल मदद (139), हाइवे एक्सीडेंट रिस्पासं (1099), प्राकृतिक आपदा (1079) और महिला एवं चाइन्ड हेल्पलाइन (181, 1098) जैसी सभी सेवाएं एक ही नंबर 112 की उपलब्ध होगी।

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