February 19, 2026

बीना विधायक निर्मला सप्रे विधायकी खतरे में

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी, फैसला सुरक्षित
भोपाल। कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची बीना विधायक निर्मला सप्रे विधायकी खतरे में पड़ती नजर आ रही है। निर्मला सप्रे ने ठीक लोकसभा चुनाव 2024 के पहले भाजपा का दामन थाम लिया था। भाजपा से जुडऩे के बाद उन्होंने बिना इस्तीफा दिए भाजपा के कार्यक्रमों में शामिल होना शुरू कर दिया। बिना इस्तीफा दिए भाजपा में शामिल हुई विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता को लेकर कांग्रेस ने विधानसभा स्पीकर को सदस्यता रद्द करने का आवेदन दिया, लेकिन 90 दिन बीत जाने के बाद स्पीकर ने कोई फैसला नहीं लिया।

्रनिर्मला सप्रे की विधायकी को चुनौती देते हुये नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने हाइकोर्ट इंदौर बेंच में रिट पिटीशन दायर की थी। इस मामले की सुनवाई पूरी हो चुकी है और हाइकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। माना जा रहा है कि जल्द ही निर्मला सप्रे का भविष्य तय हो जाएगा। विधानसभा स्पीकर द्वारा निर्मला सप्रे को लेकर नेता प्रतिपक्ष के सदस्यता रद्द करने के आवेदन पर विचार नहीं किए जाने पर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने रिट पिटीशन दायर की थी। जिसमें उन्होंने कहा कि कांग्रेस से चुनी गई विधायक निर्मला सप्रे बीजेपी के साथ चली गई हैं। लेकिन विधानसभा सदस्यता से उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया। इस आधार पर उन्होंने निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की थी। लेकिन स्पीकर ने तय 90 दिन की अवधि में कोई कार्रवाई नहीं की, इसलिए कोर्ट की शरण लेनी पड़ी।

हाइकोर्ट ने रखा फैसला सुरक्षित
इस मामले में हाइकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के वकील विभोर खंडेलवाल ने कोर्ट से कहा कि 90 दिन की तय अवधि में स्पीकर द्वारा निर्णय नहीं दिए जाने के बाद हाइकोर्ट निर्णय दे या फिर विधानसभा स्पीकर को निर्देशित करे कि वे इस मामले में निर्णय दें। इस दौरान मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से भी महाअधिवक्ता प्रशांत सिंह ने तर्क रखे। दोनों पक्षों के तर्क सुनने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है।