21 नवंबर तक भाजपा को मिल जाएगा नया ‘राष्ट्रीय कप्तान’
भोपाल/नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी में लंबे समय से लंबित राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन को लेकर अब अंतिम दौर की कवायद शुरू हो गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद संभावित रूप से 21 नवंबर तक भाजपा को नया राष्ट्रीय अध्यक्ष मिल जाएगा। मौजूदा अध्यक्ष जेपी नड्डा का कार्यकाल वर्ष 2024 में समाप्त हो चुका है और वे फिलहाल एक्सटेंशन पर संगठन की कमान संभाल रहे हैं।
उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि शीर्ष नेतृत्व स्तर पर अब अंतिम दौर की चर्चा चल रही है। अध्यक्ष पद के लिए जिन नामों पर मंथन चल रहा है, उनमें केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, धर्मेंद्र प्रधान, निर्मला सीतारमन, डी. पुरंदेश्वरी (आंध्र प्रदेश) और वनाथी श्रीनिवासन (तमिलनाडु) शामिल हैं। वनाथी श्रीनिवासन भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष रह चुकी हैं। हालांकि, पार्टी के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि सभी नामों में भूपेंद्र यादव को सबसे प्रबल दावेदार माना जा रहा है और उनके नाम पर लगभग सहमति बन चुकी है।
राजनीतिक-सामाजिक संतुलन का गणित
भूपेंद्र यादव को अध्यक्ष बनाए जाने के पीछे भाजपा का उद्देश्य केवल संगठनात्मक मजबूती नहीं, बल्कि सामाजिक संतुलन साधना भी है। वे ओबीसी वर्ग से आते हैं, जिससे पार्टी को पिछड़ा वर्ग में अपनी पकड़ और मजबूत करने का अवसर मिलेगा। यह फैसला 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर भी रणनीतिक माना जा रहा है, जहां यादव और ओबीसी वर्ग का वोट निर्णायक भूमिका निभाता है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, भूपेंद्र यादव का अध्यक्ष बनना भाजपा के लिए संगठनात्मक और चुनावी दोनों दृष्टियों से महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
मोदी-शाह के भरोसेमंद
भूपेंद्र यादव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह, दोनों का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता है। पार्टी में उन्हें ऐसा नेता माना जाता है, जिस पर संकट की घड़ी में हमेशा भरोसा किया जा सकता है। 2014 से अब तक उन्होंने मध्यप्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और बिहार सहित कई राज्यों के चुनावी प्रबंधन में अहम भूमिका निभाई है। भाजपा के अंदर उन्हें ‘क्राइसिस मैनेजर’ और कुशल रणनीतिकार के रूप में जाना जाता है।
कौन हैं भूपेंद्र यादव?
राजस्थान के अलवर जिले के निवासी भूपेंद्र यादव पेशे से वकील हैं और उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में वर्षों प्रैक्टिस की है। वे प्रारंभिक दिनों से ही आरएसएस से जुड़े रहे हैं। 2010 में उन्हें भाजपा का राष्ट्रीय सचिव बनाया गया, इसके बाद वे राष्ट्रीय महामंत्री बने और पार्टी की रणनीतिक टीम का अहम हिस्सा रहे। वर्तमान में वे मोदी सरकार में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री हैं।

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