भोपाल
थाने से फरियादी को बिना शिकायत लिए लौटाना या शिकायतकर्ता की शिकायत को नजरअंदाज करना अब थाना प्रभारी या विवेचना अधिकारी को भारी पड़ सकता है। पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं। इस निर्देश के तहत हर शिकायत का रिकॉर्ड थाने में रखना ही होगा। इसके साथ ही शिकायत की जांच करने वाले की जबावदारी भी तय कर दी जाएगी।
पुलिस मुख्यालय की सीआईडी शाखा ने इंदौर और भोपाल के पुलिस उपायुक्त के साथ ही सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए हैं कि थानों में प्राप्त होने वाली शिकायतों को थाने की जनरल डायरी में दर्ज करना होगा। साथ ही इसके रिकॉर्ड को सुरक्षित रखना होगा। डायरी में दर्ज करते ही पीड़ित या शिकायतकर्ता को जनरल डायरी में दर्ज एंट्री नंबर भी देना होगा।
इसमें शिकायत संज्ञेय अपराध की हो या असंज्ञेय अपराध की हो, दोनों ही स्थिति में जनरल डायरी में शिकायत को दर्ज करना ही होगा। जनरल डायरी में शिकायत के दर्ज होते ही इस संबंध में थाने के किसी अफसर या पुलिसकर्मी की जवाबदेही भी तय करना होगी।
एसपी करवाएंगे अधिनस्थों से पालन
पुलिस मुख्यालय से जारी निर्देश में पुलिस अधीक्षकों को यह भी ताकीद किया गया है कि वे अपने अधिनस्थों से इस संबंध में जारी दिशा निर्देशों का पालन करवाएं। पुलिस अधीक्षकों अपने अधिनस्त अफसर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक, डीएसपी, अनुविभागीय अधिकारी, सीएसपी, थाना प्रभारियों के साथ ही विवेचना करने वाले सभी अधिकारियों से इन निर्देशों का पालन करवाएंगे।
देना होगी पावती
इस निर्देश में यह भी साफ कर दिया गया है कि थाने में प्राप्त होने वाली हर शिकायत की पावती देना अनिवार्य होगा। यह सुनिश्चित करना पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी होगी कि हर शिकायतकर्ता को पावती उपलब्ध हो।

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