कांकेर.
सुदूर अंचलों के आदिवासी बच्चों की बेहतर शिक्षा के लिए एकलव्य आवासीय विद्यालय की शुरुवात की गई थी, लेकिन कांकेर जिले के दुर्गुकोंदल में स्थित एकलव्य विद्यालय में समस्याओं का अंबार लगा हुआ है। यहां के सातवीं, आठवीं और नौवीं में पढ़ने वाले वाले 31 बच्चे सोमवार को किराये के रुपये जमाकर 70 किमी बस से सफर कर कांकेर मुख्यालय कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे।
एकलव्य विद्यालय के बच्चों का आरोप था कि उन्हें प्रिंसपल द्वारा प्रताड़ित किया जाता है। उनके खाने के चावल में कंकड़, पत्थर और कीड़े निकलते हैं। जब वे इसकी शिकायत प्रिंसपल से करते हैं तो उन्हें टीसी देने की बात कहते हैं। एकलव्य विद्यालय में साफ-सफाई नही होती है। शौचालय से लेकर बाथरूम तक उन्हें साफ करना पड़ता है। सफाई कर्मचारी को प्रिंसपल अपने खेत में काम करने के लिए ले जाता है। छात्रों ने बताया कि छोटी-छोटी गलतियों पर टीसी काटने की बात कहते हैं। पालकों से मिलने नहीं देते। पालकों के साथ भी गंदा व्यवहार करते हैं। 2022 से जब से एकलव्य आवासीय महाविद्यालय खुला है, तब से छात्रों के साथ ऐसा ही व्यवहार किया जा रहा है। छात्रों ने कहा कि वे बहुत डरे हुए थे। आज हिम्मत जुटाकर किसी तरह यहां तक आए हैं। पूरे मामले को लेकर आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त सीएल कुर्रे ने कहा कि बच्चे प्रिंसपल की शिकायत लेकर आए है। प्रिंसिपल थोड़ा सख्त रवैया अपना रहे हैं। बच्चों की शिकायत पर जांच की जाएगी।

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