भोपाल
राजधानी में आयोजित पांच दिवसीय वन मेले में पांच दिन में 60 लाख रूपये से ज्यादा राज्य लघु वनोपज संघ ने व्यापार किया है। उसके बाद संघ ने सहकारी लघुवनोपज समितियों को एक बड़ा बाजार मुहैया कराने को लेकर तैयारी शुरू कर दिया है।
इससे प्रदेश की जड़ी- बूटियों को ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए समितियां लोगों तक पहुंचाए। संघ से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि अगर वनोपज संघ ऑनलाइन शॉपिंग की दिशा में सफल होता है तो आने वाले समय में समितियां आर्थिक तौर पर पहले से ज्यादा मजबूत हो जाएगी। गौरतलब है कि निजी कंपनियां पहले से ही ई- मार्केटिग के क्षेत्र में अपना कब्जा जमा चुकी है। अगर सहकारी समितियां अपने उत्पादों को ई- मार्केटिंग के क्षेत्र में उतारती है तो निश्चित ही निजी कंपनियों का दबदबा आयुर्वेद के क्षेत्र में पहले से ज्यादा कमजोर साबित होगा।
वनोपज समितियों के मोबाइल नंबर किए जाएंगे जारी
राज्य लघु वनोपज संघ के अधिकारी वनोपज समितियों के मोबाइल नंबर जारी करने की तैयारी कर रहे है। जिससे आम आदमी इन समितियों से जुड़े लोगों से आसानी से संपर्क कर सकें और इनके उत्पादों को लेकर चर्चा कर सकें। साथ ही संघ इनके औषधीय उत्पादों के गुण को आम जन तक पहुंचाने की दिशा में विचार कर रहा है। जिससे नई पीढ़ी आयुर्वेद को बेहतर से जान सकें। मेले के अलावा समितियोें के पास बड़े स्तर पर जुड़ने का कोई और दूसरा विकल्प नहीं है। यही वजह है कि राज्य लघु वनोपज संघ अब सहकारी समितियों को पहले से ज्यादा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में विचार कर रहा है।
अधिकारियों से चर्चा करूंगा
ऑनलाइन शापिंग को लेकर विभाग के अधिकारियों से चर्चा कंरूगा और प्रदेश में समितियों द्वारा किए जा रहे उत्पाद को बड़े स्तर पर पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।
–नागर सिंह चौहान, वन मंत्री

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