उत्तराखंड
उत्तराखंड के सरकारी स्कूल के छात्र अब भगवान श्रीराम के साथ राज्य के पारंपरिक रिश्तों के बारे में पढ़ेगे। पहली से बाहरवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों के किताबों में हमारी विरासत किताब जोड़ी जाएगी। इसमें भगवान श्री राम की उतराखंड से जुड़ी मान्यताओं के बारे में जानकारी दी जाएगी। पौराणिक मान्यताओं की बात करें तो प्रभु श्रीराम ने ऋषिकेश और टिहरी के देवप्रयाग में तप किया था। आपको बता दें कि हमारी विरासत पुस्तक में राज्य के धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक विशिष्टताओं को शामिल किया जाएगा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 ने भी क्षेत्रवार विशिष्ट सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक विशिष्टताओं, ज्ञान परंपराओं की जानकारी छात्रों को देने पर जोर दिया है। शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के निर्देश पर एससीईआरटी हमारी विरासत नाम से तैयार की जा रही किताब में पौराणिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं राजनीतिक महत्व की जानकारी मिलेगी। इसके अलावा राज्य के सभी तीर्थस्थल, पंच प्रयाग सहित ऐतिहासिक धरोहरों का ब्योरा व अन्य घटनाओं की ज़िक्र भी होगा। साथ ही प्रदेश की महान विभूतियों, वीरांगनाओं, सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े सेनानियों,वैज्ञानिकों, साहित्यकारों, विभिन्न आंदोलनों एवं खेलों से जुड़े व्यक्तियों की जानकारी भी इसमें शामिल की जाएगी।
भगवान राम का उत्तराखंड का कनेक्शन काफी महत्वपूर्ण है, जिसके चलते नई पीढ़ी के लिए अपने सांस्कृतिक गौरव के बारे में जानकारी होना भी जरूरी है। हमारी विरासत में सभी श्रीराम के साथ-साथ अन्य सभी महत्वपूर्ण पहलुओं को भी समाहित किया जा रहा है। जानकारी के लिए बता दें कि राज्य में श्रीराम से जुड़े प्राचीन मंदिरों की संख्या 18 तक मानी जाती है। प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के दौरान भी इन सभी मंदिरों में काफी भव्य आयोजन किए गए थे।

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