कर्नाटक
कर्नाटक विधानसभा चुनाव के बाद देश की नजरें तीन बड़े राज्यों पर होंगी। इनमें मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ शामिल है। अब राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रीवा यात्रा ने एमपी चुनाव को और चर्चा के केंद्र में ला दिया है। हालांकि, इसकी कई वजह भी हैं। एमपी के विंध्य क्षेत्र को काफी अहम और राजनीति के लिहाज से काफी विकसित भी माना जाता है।
पहले 2018 चुनाव समझें
साल 2018 विधानसभा चुनाव में विंध्य ने ही कांग्रेस को बहुमत हासिल करने से रोका था। जबकि, पार्टी ग्वालियर-चंबल, महाकौशल, बुंदेलखंड, मालवा, निमाड़ और भोपाल-होशंगाबाद में अच्छा प्रदर्शन कर चुकी थी। यहां के 30 विधानसभा क्षेत्रों में से भाजपा को 24 में से जीत हासिल करने में सफलता मिल गई थी।
भाजपा के सामने क्या चुनौतियां?
राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा को विंध्य क्षेत्र पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखना होगा। यहां मुख्य रूप से मुकाबला भाजपा और कांग्रेस के बीच होता रहा है। अब दोनों ही दलों के आंतरिक सर्वे कांग्रेस की वापसी की ओर इशारा कर रहे हैं। नगर निगम चुनाव में कांग्रेस ने रीवा नगर निगम के मेयर सीट हासिल की थी। वहीं, 2021 में पार्टी को रायगांव उपचुनाव में जीत मिली थी।
कहा जाता है कि मार्च 2020 में सत्ता में वापसी के साथ ही भाजपा के इस गढ़ में दरारें नजर आने लगी थीं। उस दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया कांग्रेस छोड़कर भाजपा के साथ हो लिए थे। इसके बाद गठित कैबिनेट में विंध्य की हिस्सेदारी बेहद कम रही। माना जाने लगा कि विधानसभा स्पीकर के तौर पर गिरीश गौतम की नियुक्ति भी खास असर नहीं डाल पाई थी।
खास बात है कि पीएम मोदी से पहले फरवरी में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह भी सतना पहुंचे थे। पीएम के हालिया दौरे पर राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत 4 लाख से ज्यादा आवास समर्पित किए गए। तीन नए रेलगाड़ियों का ऐलान हुआ, स्वामित्व कार्ड बांटे गए। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने क्षेत्र में एयरपोर्ट निर्माण की बात भी कह दी।

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