भोपाल
प्रदेश की ब्यूरोक्रेसी बहती हवा के रुख को देखते हुए अपना रास्ता बदलती रहती है। ताजा विधानसभा चुनाव के वक्त यह प्रशासनिक गलियारे में यह नजारा साफ देखने को मिला। मंत्रालय और पुलिस मुख्यालय में बैठे टॉप ब्यूरोक्रेट्स को चुनावी माहौल देखते हुए जब यह अहसास होने लगा कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन हो सकता है और कांग्रेस सरकार बना सकती है तो उन्होंने पीसीसी चीफ कमलनाथ और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह से अपने संपर्क बढ़ाने शुरू कर दिए थे।
प्रदेश में मलाईदार पोस्टिंग की चाह रखने वाले मंत्रालय और पीएचक्यू के ब्यूरोक्रेट्स अपनी मुलाकातों के दौरान उन्होंने कमलनाथ और दिग्विजय सिंह को भरोसा भी दिलाया कि वे उनके साथ हैं। उनकी मुलाकातों और संपर्कों का सीधा सा आशय था कि सत्ता में आने के बाद उनका भी विशेष ध्यान रखा जाए। उनकी मुलाकात खबरें न बन पाए इसके लिए उन्होंने सभी मुलाकातें भोपाल में न करते हुए दिल्ली में की। इन टॉप ब्यूरोक्रेट्स में वो अफसर हैं जिनका रिटायरमेंट अगले एक दो साल में हैं और जिन्हें भाजपा सरकार में अच्छी पोस्टिंग नहीं मिल पाई थी।
अब इन पर नजर
अब चूंकि प्रदेश में भाजपा के पास प्रचंड बहुमत है, ऐसे में इन सभी ब्यूरोक्रेट्स अब परेशानी में पड़ सकते हैं। उनकी मुलाकातों की जानकारी और पूरी रिपोर्ट भाजपा के पास है। ऐसे में अब उन्होंने तुरंत ही पाला बदलना भी शुरू कर दिया है। अब ये सभी अफसरों ने भाजपा में सक्रिय हो गए हैं। कांग्रेस नेताओं से संपर्क को अपनी गलती बताते हुए वे अब भाजपा का साथ निभाने की बातें कर रहे हैं।
आचार संहिता से पहले शुरू हो गई थी मुलाकातें
गौरतलब है कि अफसरों की कांग्रेस लीडर्स के साथ मुलाकातें प्रदेश में आचार संहिता लगने से पहले ही शुरू हो गई थी। मंत्रालय में बैठे इन बड़े अफसरों की कांग्रेस नेताओं से संपर्क की भनक उसी वक्त से भाजपा नेताओं को हो गई थी।
जल्द हो सकती है प्रशासनिक सर्जरी
प्रदेश में सरकार बनते ही जल्द ही प्रशासनिक सर्जरी को अंजाम दिया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार जिन जिलों की विधानसभाओं में भाजपा को नुकसान पहुंचा है वहां के कलेक्टर और एसपी तबादलों के दायरे में आ सकते हैं।

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