भोपाल
प्रवर्तन निदेशालय ने भोपाल में पीपुल्स ग्रुप पर एक्शन लिया है। ग्रुप की 230.4 करोड़ की संपत्ति अस्थायी तौर पर अटैच कर ली गई है। कुर्क की गई संपत्तियां भूमि, भवन और मशीनरी के रूप में हैं। इन संपत्तियों में कॉलेज, स्कूल, प्रशिक्षण केंद्र, पेपर मिल, अखबारी कागज मशीनरी आदि शामिल हैं। धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत ये कार्रवाई की गई है।
बता दें कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सुरेश नारायण विजयवर्गीय (एसएन विजयवर्गीय), राम विलास विजयवर्गीय (दिवंगत), पीपुल्स इंटरनेशनल एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, पीजीएच इंटरनेशनल के खिलाफ दायर 3 अभियोजन शिकायतों के आधार पर जांच शुरू की थी। ग्वालियर स्थित रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज ने शिकायत दाखिल की थी। जांच से पता चला कि एसएन विजयवर्गीय ने एफडीआई के रूप में प्राप्त धन का उपयोग करके, संदिग्ध तरीकों और साधनों का उपयोग करके खुद को और अपने नियंत्रण वाली संस्थाओं को समृद्ध किया। जिससे 3 कंपनियों (पीपुल्स इंटरनेशनल एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड, पीजीएच इंटरनेशनल प्राइवेट लिमिटेड और पीपुल्स जनरल हॉस्पिटल प्राइवेट लिमिटेड) के शेयरधारकों के हितों को नुकसान पहुंचा।
ईडी की जानकारी के अनुसार 2000-2011 के दौरान पीपुल्स ग्रुप की 3 कंपनियों में 494 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ और इसे ब्याज मुक्त (या बहुत कम ब्याज) 'ऋण', 'सुरक्षा जमा' के रूप में निकाल लिया गया। 2000 से 2022 के दौरान एसएन विजयवर्गीय और उनके नियंत्रण में संबंधित संस्थाओं को अग्रिम और ऐसे अन्य नामों से, जिसके परिणामस्वरूप 594.65 करोड़ रुपये की अपराध आय हुई। आगे यह भी पता चला कि उक्त आय का उपयोग एसएन विजयवर्गीय, सार्वजनिक पारमार्थिक जनकल्याण न्यास (एसजेपीएन) (एक सार्वजनिक ट्रस्ट जिस पर एसएन विजयवर्गीय ने ट्रस्टी के रूप में प्रमुख नियंत्रण किया था) और पीजी इंफ्रास्ट्रक्चर एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड (एक कंपनी जिसकी 99% हिस्सेदारी थी) द्वारा कैसे किया गया था।

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