नई दिल्ली
भारत के नाम चांद के दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने का रिकॉर्ड दर्ज हो चुका है। हालांकि, ISRO यानी भारतीय अनुसंधान संगठन की ताजा उपलब्धियों की फेहरिस्त यहां खत्म नहीं होती है। कहा जा रहा है कि भारतीय स्पेस एजेंसी ने अपना रूप काफी बदल लिया है। इसमें चंद्रयान-3 की सफलता भी चार चांद लगाती नजर आ रही है। कहा जाता है कि इसरो शांति से बंद कमरे में काम करना पसंद करता था और मिशन के बारे में खुलकर चर्चाओं से बचता था। अब अगर देखें, तो इसमें काफी बदलाव आया है। एजेंसी ने चंद्रयान से जुड़े लगातार अपडेट्स दिए और लैंडिंग को YouTube पर लाखों लोगों ने एकसाथ देखा। इसका श्रेय मौजूदा प्रमुख एस सोमनाथ की अगुवाई को दिया जाता है।
अब एजेंसी पहले से ज्यादा खुलकर, दोस्ताना हो गई है। युवा वैज्ञानिकों, नए स्टार्टअप, निवेशकों के मामले में ISRO में काफी परिवर्तन आए हैं। माना जाता है कि रवैये में बदलाव की एक वजह निवेश भी है। फिलहाल, ग्लोबल कमर्शियल स्पेस मार्केट 400 बिलियन डॉलर का है, जिसके 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर तक जाने का अनुमान है।
लक्ष्य और बदलाव
इतना ही नहीं भारत भी 2040 तक इस बाजार में अपना हिस्सा बढ़ाकर 40 बिलियन डॉलर करने की योजना बना रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए ISRO ने कई बड़े बदलाव किए हैं, ताकि कर्मचारियों को साझेदारों को आकर्षित किया जा सके। इसमें ब्रेक टाइम, बातचीत और रिफ्रेशमेंट के लिए जगह बनाने जैसी कई बातें शामिल हैं। खबर से बातचीत में सोमनाथ भी कह चुके हैं कि कई आइडियाज पर चाय पीते-पीते भी बात की जा सकती है।
ISRO का आगे का प्लान
लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान को चांद की सतह पर उतारने के बाद ISRO ने आदित्य-L1 के जरिए सूर्य का रुख किया है। फिलहाल, एजेंसी सूर्य के बाद वीनस, ऑर्बिट में एस्ट्रोनॉट्स को पहुंचाने और NASA के साथ साझेदारी की तैयारी कर रही है।

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