रायपुर
संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय रायपुर द्वारा आयोजित राष्ट्रीय शोध संगोष्ठी के दूसरे दिन तीन अकादमिक सत्रों का आयोजन हुआ। दो दिनों में पांच अकादमिक सत्रों के अंतर्गत 37 शोध पत्र प्रस्तुत किए गए।
कोलकाता की शोध छात्रा सुतपा भट्टाचार्य ने अभिलेखागार में रिकार्ड कीपिंग की प्रणाली पर, डॉ. ब्रज किशोर प्रसाद ने अभिलेखागारों के बदलते स्वरूप, डॉ. वृषोत्तम साहू ने बालोद तहसील के नवीन अन्वेषित पुरास्थल, ओडिशा के शोध छात्र चूड़ामणि राणा ने बरगढ़ जिले के प्रागैतिहासिक पुरातत्त्वीय अन्वेषण पर, डॉ. दीपक वर्मा ने अभिलेखागार में डिजिटाइजेशन पर, नीलिमा शर्मा, तापस बसाक और विष्णु नेताम ने संस्कृति विभाग छत्तीसगढ़ के अभिलेखागार पर, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के डॉ. हयग्रीव परिहार ने पुरातत्व के क्षेत्र में नवीन तकनीक के प्रयोग पर, शिवम त्रिवेदी और आलोक कुमार साहू ने महादेव मंदिर देवबलोदा पर, अमर भरतद्वाज ने तरपोंगी ग्राम में खोजे गए शिलालेख पर शोध प्रस्तुत किया। प्रो एस के चहल, डॉ. आनंद भट्टाचार्य, आभा रूपेंद्र पाल, जी एल रायकवार, राहुल कुमार सिंह और डॉ अतुल प्रधान ने अकादमिक सत्रों के संचालन में योगदान दिया। इस अवसर पर संगोष्ठी शाखा के प्रभारी अधिकारी डॉ. पी. सी. पारख, उप संचालक, समीर मिश्र, उप संचालक सहित विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित थे। मंच संचालन और कृतज्ञता ज्ञापन प्रभात कुमार सिंह, पुरातत्ववेत्ता ने किया।

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