TMC के बागी सांसद जिस NCPI में करने जा रहे विलय, जानिए कौन है इसका संस्थापक और बंगाल से क्या है कनेक्शन?

कोलकाता 
 राजनीति की अच्छी समझ रखने वाले किसी व्यक्ति के लिए भी 'नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ इंडिया' (NCPI) का नाम सुनना लगभग नामुमकिन है। अब यह लोकसभा की पांचवीं सबसे बड़ी पार्टी बनने जा रही है। एक चौंकाने वाली घटनाक्रम में, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सूचित किया कि उनके समूह का विलय NCPI के साथ हो गया है। यह पश्चिम बंगाल के हावड़ा में रजिस्टर्ड है और जिसने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में कुछ सीटों पर चुनाव लड़ा था। बागी सांसदों ने कहा कि वे एनसीपीआई और BJP के नेतृत्व वाले NDA का समर्थन करेंगे।

दिलचस्प बात यह है कि अपने अधिकारों को बचाने के लिए, राजनीतिक दल बदलने वालों को नकारें NCPI के नारों में से एक था। इस विलय से यह कम जानी-पहचानी पार्टी सत्ताधारी गठबंधन में BJP (240) के बाद और TDP (16) व JDU (12) से आगे दूसरा सबसे बड़ा गुट (20 लोकसभा सदस्य) बन जाएगी।

चुनाव आयोग में करेंगे टीएमसी के चिन्ह पर दावा
टीएसी के बागी सासंदों ने लोकसभा स्पीकर से उन्हें ट्रेज़री बेंच (सत्ता पक्ष की सीटों) पर जगह देने का अनुरोध किया, क्योंकि अब तक वे संसद में TMC के सदस्य के रूप में विपक्षी दलों के साथ बैठते थे। सुदीप बंद्योपाध्याय छह बार के सांसद होने के नाते इस अलग हुए गुट के सबसे अनुभवी सदस्य हैं। उन्होंने असली TMC होने का दावा करने के लिए चुनाव आयोग जाने की संभावना भी खुली रखी है।

TMC बागियों के पास ज़रूरी 2/3 संख्या से 1 सांसद ज्यादा है
स्पीकर ओम बिरला के साथ बैठक के बाद, सुदीप बंद्योपाध्याय ने कहा कि यह विलय दलबदल विरोधी कानून (संविधान की दसवीं अनुसूची) की ज़रूरतों के अनुसार किया गया है। यह कानून पार्टी में विभाजन को मान्यता नहीं देता है। एक ऐसा बिंदु जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने 2022 में शिवसेना में विभाजन के मामले में भी जोर दिया था। हालांकि एक पार्टी के दो-तिहाई सदस्यों के दूसरी पार्टी में विलय के लिए अपवाद की अनुमति देता है। 20 सांसदों के साथ, TMC के बागी गुट के पास ज़रूरी दो-तिहाई संख्या से एक सांसद ज़्यादा है, क्योंकि लोकसभा में TMC के कुल 28 सदस्य हैं।

हावड़ा में रजिस्टर्ड, पर त्रिपुरा में मौजूदगी
NCPI चुनाव आयोग (EC) के पास रजिस्टर्ड लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है। यह उन 2,049 पार्टियों में से एक है जो मान्यता प्राप्त करने के लिए ज़रूरी चुनावी प्रदर्शन के स्तर तक नहीं पहुंच पाई हैं। NCPI को जनवरी 2023 में भारत के चुनाव आयोग (ECI) के साथ रजिस्टर किया गया था। यह पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में रजिस्टर्ड है, लेकिन इसने मुख्य रूप से त्रिपुरा में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बनाने की कोशिश की है।

श्वेली कुंडू राष्ट्रीय अध्यक्ष
एनसीपीआई का आधिकारिक चुनाव चिह्न सात स्ट्रोक वाला इंक पेन का निब है। पार्टी ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनावों में अपनी शुरुआत की। पार्टी ने कुछ चुनिंदा निर्वाचन क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारे, लेकिन बहुत कम वोट मिले और यह चुनाव पर कोई खास असर नहीं डाल पाई। इस पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्वेली कुंडू हैं।

हावड़ा में तरुण कुमार रॉय पार्टी चीफ
2023 में बनी इस पार्टी का चुनाव चिह्न सात किरणों वाली पेन की निब है और त्रिपुरा व मेघालय में इसकी कुछ मौजूदगी है। हालांकि, यह कभी भी ज़्यादा लोकप्रियता हासिल नहीं कर पाई और इसे बड़ी पार्टियों के साथ-साथ TIPRA और IPFT जैसे क्षेत्रीय दलों से भी नकारा गया है। त्रिपुरा में शांतनु साहा पार्टी का कामकाज संभालते हैं, जबकि हावड़ा के तरुण कुमार रॉय कथित तौर पर इसके कामकाज में शामिल हैं।.

अभिषेक बनर्जी की गुहार
उन्होंने तृणमूल कांग्रेस लोकसभा संसदीय दल के नेता अभिषेक बनर्जी द्वारा लिखा गया एक पत्र लोकसभा अध्यक्ष को सौंपा, जिसमें उनसे किसी भी कथित अलग गुट को मान्यता न देने का आग्रह किया गया है। इस पत्र में तर्क दिया गया है कि संविधान किसी मौजूदा राजनीतिक दल के भीतर एक अलग समूह बनाने की अनुमति नहीं देता है।

10 जून की तारीख वाले इस पत्र को पहले ईमेल के जरिए भी भेजा गया था, जिसमें कहा गया है कि दलबदल विरोधी कानून इस तरह के विभाजन की इजाजत नहीं देता। पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी ने अपने पत्र में अनुरोध किया है कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (एआईटीसी) को एक ही राजनीतिक पार्टी माना जाए जिसका प्रतिनिधित्व सदन में केवल उसके अधिकृत नेता और मुख्य सचेतक द्वारा किया जाए। उन्होंने यह भी आग्रह किया कि बागी सांसदों की ओर से किसी भी तरह के पत्राचार या अनुरोध पर कोई फैसला करने से पहले पार्टी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाए।

महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट मामले में सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ के फैसले का हवाला देते हुए बनर्जी ने तर्क दिया कि 10वीं अनुसूची के तहत अब विभाजन का बचाव उपलब्ध नहीं है। वर्तमान कानूनी ढांचा किसी एक राजनीतिक दल की पहचान को मान्यता देता है न कि उसके भीतर मौजूद विरोधी गुटों को अलग अलग मान्यता देता है।

बनर्जी ने यह भी कहा कि विलय के किसी भी दावे के लिए राजनीतिक पार्टी का विलय और दो-तिहाई विधायकों का समर्थन, दोनों जरूरी हैं और कानून के तहत इनमें से सिर्फ एक शर्त पूरी करना काफी नहीं होगा। लोकसभा स्पीकर से मुलाकात के बाद आजाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ ने यह साफ कर दिया है कि एक राजनीतिक पार्टी में विभाजन मंजूर नहीं है।

NCPI पार्टी क्या है?
नेशनलिस्ट सिटीजन्स पार्टी ऑफ इंडिया यानी NCPI त्रिपुरा की एक कम प्रसिद्ध रजिस्टर्ड, लेकिन गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी है जिसकी कोई खास राजनीतिक मौजूदगी नहीं है। NCPI ने 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में कुछ सीटों पर चुनाव लड़ा था जिसमें इसके उम्मीदवार या तो नोटा से पीछे रहे या उन्हें उससे बस कुछ ही अधिक वोट मिले।

पार्टी का इतिहास
उपलब्ध चुनाव आयोग और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, NCPI को 20 जनवरी 2023 को एक Registered Unrecognised Political Party (RUPP) के रूप में रजिस्टर्ड किया गया था। पार्टी का रजिस्ट्रेशन एड्रेस पश्चिम बंगाल के हावड़ा जिले में बताया जाता है। लेकिन इसने अपनी शुरुआती चुनावी गतिविधियां मुख्य रूप से त्रिपुरा में की थीं। 2023 के त्रिपुरा विधानसभा चुनाव में पार्टी ने भाग लिया, लेकिन उसे कोई बड़ी चुनावी सफलता नहीं मिली। जून 2026 में पार्टी अचानक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई, जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 बागी सांसदों ने इसमें विलय की घोषणा की। इस घटनाक्रम से NCPI की संसदीय उपस्थिति काफी बढ़ गई।

संस्थापक और नेतृत्व
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रिपोर्टों में उत्तिया कुंडू (Uttiya Kundu) को पार्टी का अध्यक्ष बताया गया है। जबकि पार्टी की कोषाध्यक्ष (Treasurer) श्यूली कुंडू (Shewly Kundu) हैं। हालांकि विभिन्न मीडिया रिपोर्टों में पार्टी के वर्तमान नेतृत्व का उल्लेख मिलता है। लेकिन संस्थापक के रूप में किसी एक व्यक्ति का स्पष्ट और आधिकारिक उल्लेख सभी स्रोतों में उपलब्ध नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पार्टी के गठन और संचालन में कुंडू परिवार की प्रमुख भूमिका रही है।

विचारधारा और उद्देश्य
NCPI खुद को राष्ट्रवादी और नागरिक-केंद्रित राजनीति से जोड़ती है। शुरुआती चरण में इसका प्रभाव मुख्य रूप से बंगाली भाषी क्षेत्रों और पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों तक सीमित रहा। लेकिन 2026 में NDA को समर्थन देने की घोषणा के बाद इसकी राजनीतिक पहचान और चर्चा बढ़ी है।

त्रिपुरा चुनाव में तीन सीटों पर लड़ी थी एनसीपीआई
2023 के त्रिपुरा चुनावों में, NCPI ने तीन उम्मीदवार उतारे थे ऊनाकोटी ज़िले के कैलाशहर से जहांगीर अली, चावमानु से बरजेदा त्रिपुरा और अंबासा से कृष्ण कुमार देबबर्मा। इसके बावजूद, यह पार्टी लगभग न के बराबर ही रही है। अब अचानक, NCPI छह महिला सांसदों (सायोनी घोष, शताब्दी रॉय, रचना बनर्जी, जून मालिया, काकोली घोष दस्तीदार और माला रॉय) और मुर्शिदाबाद के तीन मुस्लिम सांसदों (खलीलुर रहमान, अबू ताहिर और यूसुफ पठान) को NDA में शामिल करेगी।

भूपेंद्र यादव के आवास पर मिले थे बागी सांसद
बागी सांसदों ने पहले केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर मुलाकात की थी और उनके साथ BJP सांसद निशिकांत दुबे भी शामिल हुए, जिन्होंने TMC को तोड़ने में अहम भूमिका निभाई थी। सूत्रों के मुताबिक, 19 सांसद व्यक्तिगत रूप से मौजूद थे, जबकि एक सदस्य ने अपना समर्थन देने का वादा किया है। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले दिनों में TMC के और राज्यसभा सदस्य इस्तीफा दे सकते हैं। अब तक तीन सदस्य इस्तीफा दे चुके हैं।

टीएमसी-एनसीपीआई विलय के बाद क्या होगा
एक बार जब लोकसभा स्पीकर इस विलय को मान्यता दे देंगे, तो NCPI के पास 20 सांसद हो जाएंगे। यह BJP, कांग्रेस (98), SP (37) और DMK (22) के बाद पांचवां सबसे बड़ा समूह होगा। NCPI के समर्थन से NDA की संख्या 361 (लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा) के करीब पहुंचकर 313 हो जाएगी। BJP यह आंकड़ा हासिल करने के लिए पूरी कोशिश कर रही है, क्योंकि 'सुपर मेजॉरिटी' न होने के कारण महिला आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन (जिससे सदन में सीटों की अधिकतम संख्या 543 से बढ़कर 850 हो जाती) का बिल गिर गया था।