नई दिल्ली
कर्नाटक में सिद्धारमैया की जगह डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं. बुधवार शाम चार बजे डीके शिवकुमार सीएम पद की शपथ लेंगे और 13 नेता कैबिनेट मंत्री बनाए जाएंगे.डीके शिवकुमार के अगुवाई वाली सरकार कैसे चलेगी, उसकी पूरी रूपरेखा दिल्ली में तय कर ली गई है. सीएम की कुर्सी छोड़ने वाले सिद्धारमैया को साधे रखने का ही नहीं बल्कि दिल्ली की राजनीति में अहम भूमिका की पटकथा लिख दी गई है।
कांग्रेस हाईकमान ने सिद्धारमैया को मंगलवार को पार्टी के भीतर सबसे शक्तिशाली और सर्वोच्च निर्णय लेने वाली संस्था कांग्रेस कार्य समिति का स्थायी सदस्य नियुक्त किया है.सिद्धारमैया का यह प्रमोशन न केवल उनके कद को दर्शाता है,बल्कि यह भी साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में वे दिल्ली की राजनीति में एक बड़ी राष्ट्रीय भूमिका मिलने जा रही है।
सवाल उठता है कि क्या सिद्धारमैया कांग्रेस के आलाकमान के इस निर्णय से खुश होंगे क्योंकि, उनका मन तो राज्य की राजनीति में रहना था. उन्होंने सीएम पद से इस्तीफा देने के बाद कहा था कि उनको राष्ट्रीय राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं है और राज्य में ही रहकर जनता की सेवा करनी है. ऐसे में कांग्रेस ने डीके सरकार और सिद्धारमैया के बीच सियासी संतुलन बनाए रखने का खाका दिल्ली में ही खींच दिया है ताकि कर्नाटक में किसी तरह का सियासी नाटक न हो सके?
दिल्ली में लिखी गई कर्नाटक की पटकथा
कर्नाटक की कमान अब पूरी तरह से नए हाथों में सौंप दी गई है. डीके शिवकुमार कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण करेंगे. मंगलवार को शिवकुमार और सिद्धारमैया मंगलवार को दिल्ली में थे. कर्नाटक में बनने जा रहे नए मंत्रिमंडल के स्वरूप को लेकर कांग्रेस हाईकमान से मीटिंग करनी थी, जिसके लिए इंतजार कर रहे थे।
हमेशा की तरह, मैं मंगलवार को कर्नाटक भवन पहुंचा, जो राज्य की सियासी गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है. कर्नाटक भवन में कांग्रेस नेताओं से ऑन-रिकॉर्ड और ऑफ-रिकॉर्ड मुलाकात हुई.इनमें एचके पाटिल और ईश्वर खंडारे भी शामिल थे, जो सिद्धारमैया की पिछली कैबिनेट में वरिष्ठ मंत्री थे. एक बात साफ ज़ाहिर थी कि सिद्धारमैया के जाने के बाद पिछली कैबिनेट में उनके वफ़ादार रहे नेताओं में थोड़ी घबराहट थी कि उन्हें नई कैबिनेट में जगह मिलेगी या नहीं।
सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की मंगलवार को दोपहर सवा एक बजे कांग्रेस हाईकमान के साथ मीटिंग हुई. इस मीटिंग में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे भी शामिल थे. सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार अपनी-अपनी पसंद के नामों के साथ मीटिंग में गए थे, जिन पर वे पहले ही केसी वेणुगोपाल और रणदीप सुरजेवाला के साथ चर्चा कर चुके थे।
शिवकुमार सरकार के कौन होंगे सिपहसलार
कांग्रेस हाईकमान के साथ सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार की मीटिंग हुई. इस उच्च-स्तरीय बैठकों के दौरान कैबिनेट के लिए जिन नामों पर मुहर लगी है, उनके आधार पर लगभग 13 मंत्री बनाए जा सकते हैं. सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार के खेमों के बीच संतुलन बनाते हुए कांग्रेस हाई कमान ने केजी जॉर्ज, जी परमेश्वर, रामलिंगा रेड्डी, केबी गौड़ा, यूटी खादर, एमपी पाटिल, सतीश जारकीहोली, प्रियंका खड़गे, यतींद्र और केएच मुनियप्पा की बेटी रूपा श्रीधर जैसे नामों को कैबिनेट में शामिल करने मंज़ूरी दे दी है।
डीके सरकार में साफ है कि शुरुआत अनुभवी मंत्रियों के साथ की जाए, लेकिन सूत्रों के अनुसार कैबिनेट को एक नया रूप और कलेवर दिया जाएगा. शिवकुमार की कैबिनेट में कुछ नए चेहरों को शामिल करवाएंगे ताकि मौजूदा कांग्रेस सरकार के खिलाफ 'सत्ता-विरोधी लहर' को कम किया जा सके. शिवकुमार के साथ-साथ 13 मंत्रियों के शपथ लेने की संभावना है. इसके बाद कैबिनेट का बाक़ी विस्तार 8 जून के बाद हो सकता है. राज्यसभा चुनावों के संपन्न होने के बाद कैबिनेट विस्तार होगा ताकि पार्टी के सभी नेता एकजुट और वफ़ादार बने रहें।
नए प्रदेश अध्यक्ष का एजेंडा फाइनल
डीके शिवकुमार के सीएम बनने के साथ ही कर्नाटक कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का पद खाली हो गया है. कैबिनेट के गठन के बाद दूसरी प्राथमिकता नए कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव करना है. सूत्रों का कहना है कि पार्टी ने इस अहम पद के लिए सतीश जारकीहोली से संपर्क किया था, लेकिन उन्होंने शर्त रखी कि वह प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी तभी स्वीकार करेंगे जब इसके साथ उन्हें कैबिनेट में कोई मंत्रालय भी दिया जाए।
सूत्रों ने बताया कि चूंकि ऐसा होने की संभावना कम है, इसलिए पार्टी अब उनके अलावा ईश्वर खंड्रे और बीके हरिप्रसाद जैसे अन्य नेताओं के नाम पर भी विचार कर रही है. कर्नाटक में अब मुख्यमंत्री एक प्रभावशाली जाति से आते हैं, इसलिए पार्टी चाहती है कि राज्य इकाई का नेतृत्व कोई OBC, ST या SC नेता करे, ताकि सामाजिक समीकरणों के बारे में सही संदेश दिया जा सके. बीजेपी पहले ही कांग्रेस का मज़ाक उड़ा रही है कि उन्होंने जातिगत भेदभाव के चलते अपने एकमात्र OBC मुख्यमंत्री को हटाकर एक सामान्य जाति के नेता के लिए रास्ता साफ कर दिया है।
राज्यसभा और एमएलसी चुनाव
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि राज्यसभा की 3 सीटों के लिए 80 से ज़्यादा दावेदार है जबकि MLC की 7 सीटों के लिए 200 से ज़्यादा दावेदार हैं. ऐसे में राज्यसभा की सीटों के लिए केवल एक नाम लगभग तय माना जा रहा है और वह है कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का. इसके अलावा बाकी दो सीटों के लिए YS शर्मिला, सिद्धारमैया, केजे जॉर्ज, वीवी श्रीनिवास और मंसूर अली खान जैसे नामों पर चर्चा चल रही है।
MLC के लिए बीके हरिप्रसाद का नाम भी लगभग तय माना जा रहा है, जबकि वरिष्ठ दलित नेता और पूर्व सांसद एल हनुमंतैया और अनुभवी शिया नेता आगा सुल्तान के नामों की भी चर्चा हो रही है, पार्टी अगले 24-48 घंटों में नामों को अंतिम रूप देने का फैसला ले सकती है।
सिद्धारमैया के लिए राष्ट्रीय रोल की तैयारी
सिद्धारमैया को CWC में शामिल करना कांग्रेस की उस दूरगामी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसकी चर्चा राजनीतिक गलियारों में काफी समय से थी. पहले सिद्धारमैया ने साफ तौर पर कहा था कि वे कर्नाटक की राजनीति छोड़कर केंद्र की राजनीति में नहीं जाना चाहते।
कांग्रेस आलाकमान द्वारा उन्हें राज्यसभा भेजने के प्रस्ताव को भी उन्होंने ठुकरा दिया था. लेकिन सूत्रों के अनुसार कांग्रेस पार्टी उन्हें 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले एक राष्ट्रीय स्तर के चेहरे के रूप में स्थापित करना चाहती थी. CWC की सदस्यता देकर पार्टी ने उन्हें बिना राज्यसभा भेजने की तैयारी में है ताकि ओबीसी समुदाय को कर्नाटक के साथ-साथ देशभर में साधे रखा जा सके।

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