बिलासपुर.
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े एक मामले में बैंक के रवैये पर कड़ी टिप्पणी की. हाईकोर्ट की एकलपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा है कि किसी कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके आश्रित द्वारा समय पर आवेदन प्रस्तुत किए जाने के बावजूद केवल “रिक्त पद उपलब्ध नहीं है” कहकर नियुक्ति से इंकार करना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता.
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति एके प्रसाद की एकलपीठ ने यह महत्वपूर्ण फैसला “संतोष सिन्हा बनाम छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण बैंक” प्रकरण में पारित किया गया. मामले में याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनादि शर्मा ने प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष यह प्रमुख तर्क रखा कि याचिकाकर्ता के पिता बैंक में ऑफिस अटेंडेंट के पद पर कार्यरत थे, और उनकी सेवा के दौरान मृत्यु हो गई थी. मृत्यु के मात्र दो माह के भीतर ही याचिकाकर्ता ने अनुकंपा नियुक्ति हेतु आवेदन प्रस्तुत कर दिया था, किंतु बैंक ने वर्षों मामला लंबित रख यह कहकर नियुक्ति से इंकार कर दिया कि संबंधित पद उपलब्ध नहीं है.
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता अनादि शर्मा ने न्यायालय के समक्ष तर्क रखा कि याचिकाकर्ता के पिता की सेवा के दौरान मृत्यु होने के तुरंत बाद परिवार गंभीर आर्थिक संकट में आ गया था तथा याचिकाकर्ता ने निर्धारित समयसीमा के भीतर अनुकंपा नियुक्ति हेतु आवेदन प्रस्तुत कर दिया था. उन्होंने न्यायालय को यह भी अवगत कराया कि बैंक द्वारा मामले को वर्षों तक लंबित रखा गया, जबकि समान परिस्थिति वाले अन्य अभ्यर्थियों के प्रकरणों पर निर्णय लेकर उन्हें नियुक्ति प्रदान कर दी गई. अधिवक्ता ने यह भी प्रस्तुत किया कि बैंक अपनी ही अनुकंपा नियुक्ति नीति के विपरीत कार्य कर रहा है, जबकि नीति में स्पष्ट रूप से ऐसे मामलों को सहानुभूतिपूर्ण दृष्टिकोण से विचार करने तथा आश्रित परिवारों को प्राथमिकता देने का प्रावधान है.
उन्होंने यह तर्क भी रखा कि तकनीकी आधारों एवं प्रशासनिक बहानों का सहारा लेकर आश्रित परिवार को राहत से वंचित नहीं किया जा सकता, विशेषकर तब जब कर्मचारी की मृत्यु के पश्चात रिक्ति उत्पन्न हो चुकी थी, और आवेदन भी समय पर प्रस्तुत किया गया था. बैंक द्वारा “रिक्त पद उपलब्ध नहीं होने” का तर्क तथ्यों एवं नीति दोनों के विपरीत है, तथा यह संवेदनशील मामलों में संस्थागत उत्तरदायित्व की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता.
एकलपीठ ने अपने फैसले में कहा, “जब कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु हुई, उसी क्षण संबंधित पद रिक्त हो गया था. याचिकाकर्ता ने समयसीमा के भीतर आवेदन प्रस्तुत किया था, इसलिए बाद में रिक्ति उपलब्ध नहीं होने का तर्क स्वीकार नहीं किया जा सकता.” न्यायमूर्ति एके प्रसाद की एकलपीठ ने अपने महत्वपूर्ण आदेश में कहा कि अनुकंपा नियुक्ति योजना का उद्देश्य मृत कर्मचारी के परिवार को तत्काल राहत प्रदान करना है और ऐसे मामलों में संस्थाओं को संवेदनशील एवं मानवीय दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है. न्यायालय ने बैंक द्वारा जारी आदेश को निरस्त करते हुए याचिकाकर्ता को 90 दिनों के भीतर नियुक्ति प्रदान करने के निर्देश दिए.
अपने आदेश में हाईकोर्ट ने बैंक द्वारा जारी 30 सितंबर 2022 के आदेश को निरस्त करते हुए निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता को 90 दिनों के भीतर उपलब्ध किसी भी चतुर्थ श्रेणी पद पर अनुकंपा नियुक्ति प्रदान की जाए. कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार यह फैसला उन मामलों में महत्वपूर्ण नज़ीर साबित हो सकता है, जहां संस्थाएं तकनीकी आधारों का सहारा लेकर आश्रित परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति देने से बचती रही हैं.

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