बेंगलुरु
भारतीय वायुसेना (IAF) को नए लड़ाकू विमानों की बहुत जरूरत है, लेकिन गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा बनाए जा रहे लड़ाकू विमान तेजस मार्क-1ए (Tejas Mk1A) की डिलीवरी पहले से दो साल से ज्यादा देरी से चल रही है।
अब मई 2026 में IAF और HAL के बीच एक अहम समीक्षा बैठक होने वाली है. इस बैठक में विमान की तैयारियों और इंडक्शन टाइमलाइन पर चर्चा होगी. यह बैठक नई दिल्ली के एयर हेडक्वार्टर्स में मई मध्य में हो सकती है।
नए HAL चेयरमैन रवि कोटा की भूमिका
HAL के नए चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) रवि कोटा 1 मई 2026 को पद संभालेंगे. वे वर्तमान CMD डॉ. डीके सुनील की जगह लेंगे, जो 30 अप्रैल को रिटायर हो रहे हैं. रवि कोटा को डिफेंस सर्कल में LCA मैन के नाम से जाना जाता है क्योंकि उन्होंने तेजस कार्यक्रम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
वे वर्तमान में HAL के डायरेक्टर (ऑपरेशंस) हैं. IAF चीफ एयर चीफ मार्शल एपी सिंह रिव्यू मीटिंग को लीड करेंगे. बैठक में HAL की टीम रवि कोटा के नेतृत्व में शामिल होगी. IAF चीफ पहले भी तेजस Mk1A की देरी पर सार्वजनिक रूप से चिंता जता चुके हैं।
IAF की सख्त शर्तें: गुणवत्ता पर कोई समझौता नहीं
IAF को नए विमानों की सख्त जरूरत है, लेकिन वह तब तक तेजस Mk1A स्वीकार नहीं करेगी जब तक वह सभी जरूरी ऑपरेशनल रिक्वायरमेंट्स पूरी नहीं कर लेता. HAL ने दावा किया है कि पांच तेजस Mk1A विमान तैयार हैं. वह IAF से उनकी स्वीकृति के लिए चर्चा कर रहा है।
भारतीय वायुसेना पहले इन पहले पांच विमानों की पूरी जांच करेगी. उसके बाद ही बड़े पैमाने पर इंडक्शन का फैसला होगा. IAF कुछ छोटी-मोटी या सेकेंडरी सुविधाओं पर छूट दे सकती है, लेकिन मुख्य लड़ाकू क्षमताओं पर कोई समझौता नहीं होगा।
तीन अहम क्षमताएं जिन पर IAF नहीं करेगी समझौता
IAF ने तीन महत्वपूर्ण क्षमताओं को पूरी तरह जरूरी बताया है…
मिसाइल फायरिंग क्षमता: हवा से हवा और हवा से जमीन मिसाइलों (एयर-टू-एयर और एयर-टू-ग्राउंड) की फायरिंग ट्रायल पूरी होनी चाहिए और सर्टिफिकेशन होना चाहिए।
रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) इंटीग्रेशन: विमान के रडार को EW सूट के साथ पूरी तरह इंटीग्रेट और वैलिडेट किया जाना चाहिए. यह दुश्मन के क्षेत्र में विमान की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है।
वेपन्स डिलीवरी और फायर कंट्रोल सिस्टम: पूरे वेपन्स डिलीवरी सिस्टम और फायर-कंट्रोल आर्किटेक्चर की एंड-टू-एंड वैलिडेशन होनी चाहिए।
ये तीनों चीजें तेजस Mk1A की वारफाइटिंग स्पाइन यानी लड़ाई की रीढ़ हैं. इन्हें किसी भी हाल में कमजोर नहीं किया जा सकता. मिसाइल फायरिंग ट्रायल्स पहले ही पूरा हो चुका है, जबकि रडार-EW इंटीग्रेशन और वेपन्स वैलिडेशन का काम अंतिम चरण में है।
दो साल की देरी, कारण क्या?
तेजस Mk1A कार्यक्रम में लगभग दो साल की देरी हो चुकी है. HAL का कहना है कि मुख्य वजह GE इंजन की सप्लाई में समस्या है. इसके अलावा इजरायली EL/M-2052 AESA रडार और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के इंटीग्रेशन में भी देरी हुई।
IAF का कहना है कि जब तक विमान पूरी तरह ऑपरेशनल रूप से तैयार नहीं होगा, तब तक स्वीकृति नहीं दी जाएगी. HAL के पास मजबूत ऑर्डर बुक है, जिसमें 83 तेजस Mk1A शामिल हैं. भविष्य में और ऑर्डर आने की उम्मीद है. मई की बैठक में IAF पहले पांच विमानों की पूरी जांच करेगी।
अगर सब कुछ ठीक रहा तो स्वीकृति ट्रायल्स शुरू होंगे, जो कुछ हफ्तों तक चल सकते हैं. उसके बाद ही विमानों को फ्रंटलाइन स्क्वाड्रनों में शामिल किया जाएगा. इस बीच, HAL इंजन सप्लाई बढ़ाने और उत्पादन तेज करने पर काम कर रहा है।

More Stories
8वें वेतन आयोग ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए साझा किया बड़ा अपडेट, बताया पूरा प्लान
त्तराखंड बोर्ड रिजल्ट 2026 जार,10वीं में 92.10% और 12वीं में 85.11% छात्र पास
EPFO New Rule: मई से UPI के जरिए PF का पैसा निकाले जा सकेंगे, जानें कितनी होगी लिमिट