भरूच
गुजरात हाई कोर्ट ने भरूच के जिला कलेक्टर को जबरदस्त फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि आप कलेक्टर हैं, लेकिन आप एक अनपढ़ आदमी हैं। आपको उन नियमों की जानकारी नहीं है जिनका पालन आपको करना चाहिए। आपको तो अपनी खुद की शक्तियों के बारे में भी पता नहीं है। मामला एक जनहित याचिका के जवाब से जुड़ा था।
बार एंड बेंच की एक रिपोर्ट के अनुसार, एक जनहित याचिका के जवाब में एक अस्पष्ट हलफनामा दायर करने के लिए गुजरात हाई कोर्ट ने शुक्रवार को भरूच के जिला कलेक्टर को फटकार लगाई। याचिका में अमोनियम नाइट्रेट भंडारण इकाइयों द्वारा सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया था। चीफ जस्टिस सुनीता अग्रवाल और जस्टिस डीएन राय की बेंच ने कहा कि कलेक्टर अनपढ़ हैं। उन्हें संबंधित नियमों की जानकारी नहीं हैं। यहां तक कि उन्हें अपनी खुद की शक्तियों के बारे में भी कोई ज्ञान नहीं था।
अमोनियम नाइट्रेट के भंडारण से जुड़ा मामला
चीफ जस्टिस ने कहा कि तो आप एक अनपढ़ आदमी हैं। आप कलेक्टर हैं, लेकिन आप एक अनपढ़ आदमी हैं। आपको उन नियमों की जानकारी नहीं है, जिनका पालन आपको करना चाहिए। आपको अपनी खुद की शक्तियों के बारे में भी पता नहीं है। कोर्ट में दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि जिले में अमोनियम नाइट्रेट (विस्फोटक पदार्थ) के भंडारण और प्रोसेसिंग में लगी औद्योगिक इकाइयां जरूरी सुरक्षा नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं।
इस मामले के केंद्र में मौजूद इस केमिकल को भारतीय कानून के तहत लंबे समय से एक खतरनाक पदार्थ माना जाता रहा है। इसे खतरनाक रसायनों के निर्माण, भंडारण और आयात नियम, 1989 के तहत सूचीबद्ध किया गया है, जिन्हें भोपाल गैस त्रासदी के बाद बनाया गया था। यह अमोनियम नाइट्रेट नियम, 2012 द्वारा भी शासित होता है।
किसी भी तरह की चूक के विनाशकारी परिणाम होंगे
याचिका के अनुसार, इन नियमों में सख्त लाइसेंसिंग व्यवस्था लागू की गई है। साथ ही इसके निर्माण, भंडारण, परिवहन और संचालन के लिए विस्तृत सुरक्षा उपाय निर्धारित किए गए हैं, क्योंकि यह अत्यधिक विस्फोटक पदार्थ है। याचिका के अनुसार, इन नियमों का प्रवर्तन मुख्य रूप से पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) के अधीन कार्यरत मुख्य विस्फोटक नियंत्रक, जिला मजिस्ट्रेट (कलेक्टर) और स्थानीय पुलिस के अधीन है। याचिका में चेतावनी दी गई कि नियमों के पालन में किसी भी तरह की चूक के विनाशकारी परिणाम हो सकते हैं। विशेष रूप से उन सघन औद्योगिक क्षेत्रों में जहां अमोनियम नाइट्रेट की बड़ी मात्रा को अन्य खतरनाक कार्यों और रिहायशी इलाकों के बेहद करीब ही संभाला जाता है।
कलेक्टर द्वारा पेश किया गया हलफनामा खारिज
कोर्ट ने कलेक्टर द्वारा पेश किए गए हलफनामे को खारिज कर दिया और यह टिप्पणी की कि 2012 के नियमों से पहले भी अमोनियम नाइट्रेट विस्फोटक नियम 2008 के नियामक दायरे में आता था। पुरानी इकाइयों के लिए सुरक्षा मानदंडों की अनदेखी नहीं की जा सकती थी। कोर्ट ने यह सवाल उठाया कि क्या राज्य ने उन पिछली रिपोर्टों पर कोई कार्रवाई की थी, जिनमें मानदंडों के उल्लंघन का खुलासा हुआ था। हलफनामे में दिया गया यह बयान अस्पष्ट है, क्योंकि इसमें यह साफ नहीं है कि कौन सी इकाई निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रही थी। ऐसा लगता है कि रिकॉर्ड में ऐसा कुछ भी नहीं है और न ही जिला कलेक्टर के शपथ-पत्र में ऐसा कुछ है जिससे यह पता चले कि 19 मार्च 2025 और 23 मार्च 2026 की रिपोर्टों पर जिला मजिस्ट्रेट या कलेक्टर द्वारा कोई कार्रवाई की गई हो।
कोर्ट ने वकील की आलोचना की
कोर्ट ने अधिकारियों द्वारा पेश एक नई रिपोर्ट पर संदेह व्यक्त किया, क्योंकि यह बिना किसी उचित स्पष्टीकरण के उल्लंघन से संबंधित पिछली निष्कर्षों के उलट थी। इसके अलावा, कोर्ट ने राज्य के एक वकील की आलोचना की, जिन्होंने उसके समक्ष इतना अस्पष्ट हलफनामा दायर किया था। कोर्ट ने कहा कि आप अधिकारियों के मुखपत्र नहीं हैं। इस तरह का हलफनामा दायर करके आप अधिकारियों के मुखपत्र बन जाते हैं, जबकि आप एक वकील हैं।
आप हमें हल्के में ले नहीं सकते
कोर्ट ने कहा कि हम सब्र रख रहे हैं, इसका मतलब यह नहीं है कि आप हमें हल्के में ले सकते हैं। जब वकील ने हलफनामा वापस लेने और उसकी जगह नया हलफनामा दाखिल करने की अनुमति मांगी तो अदालत ने इसकी इजाजत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि हम आपको इसे यूं ही वापस लेने की अनुमति नहीं देंगे। मुख्य मुद्दा केवल यह नहीं था कि कौन से नियम लागू होते हैं, बल्कि यह था कि क्या विस्फोटक के भंडारण के लिए निर्धारित सुरक्षा मानदंडों का वास्तव में पालन किया जा रहा था।
कलेक्टर को निर्देश दिया
इसके बाद कोर्ट ने अंकलेश्वर के मामलतदार और कार्यपालक मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया कि वे समय-समय पर लागू नियमों को ध्यान में रखते हुए प्रतिवादी इकाइयों का एक नया निरीक्षण करें। कोर्ट ने कलेक्टर को यह भी निर्देश दिया कि वे इन निष्कर्षों की स्वतंत्र रूप से जांच करें। यदि कोई उल्लंघन पाया जाता है तो की गई कार्रवाई की रिपोर्ट के साथ एक नया हलफनामा दाखिल करें। इस मामले की अगली सुनवाई जून में होगी।

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