भोपाल.
अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान ने कहा है कि प्रदेश सरकार अनुसूचित जाति वर्ग के युवाओं को आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। विभिन्न स्वरोजगार एवं वित्तीय सहायता योजनाओं से युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ उन्हें उद्यमिता के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। मंत्री चौहान ने कहा कि प्रदेश राज्य सहकारी अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम के माध्यम से संचालित योजनाओं का उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना एवं उनके जीवन स्तर में सुधार लाना है।
संत रविदास स्वरोजगार योजना
योजना में अनुसूचित जाति वर्ग के 18 से 45 वर्ष आयु के युवाओं को स्वरोजगार स्थापित करने के लिए बैंक ऋण एवं ब्याज अनुदान उपलब्ध कराया जाता है। उद्योग स्थापना के लिए 1 लाख से 50 लाख रुपये और सेवा एवं खुदरा व्यवसाय के लिए 1 लाख से 25 लाख रुपये तक का बैंक ऋण प्रदान किया जाता है। योजना में 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान अधिकतम 7 वर्षों तक दिया जाता है। पात्रता के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता 8वीं कक्षा उत्तीर्ण निर्धारित है।आवेदक की वार्षिक आय सीमा 12 लाख तक निर्धारित है।
डॉ. भीमराव अंबेडकर आर्थिक कल्याण योजना
योजना का उद्देश्य अनुसूचित जाति वर्ग के पात्र व्यक्तियों को स्वरोजगार के लिए लघु स्तर पर बैंक ऋण और ब्याज अनुदान उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। योजना में 18 से 55 वर्ष आयु वर्ग के हितग्राहियों को स्वरोजगार के लिए 10 हजार से 1 लाख रुपये तक का बैंक ऋण उपलब्ध कराया जाता है।योजना में शैक्षणिक योग्यता का कोई बंधन नहीं है। आयकर दाता नहीं होने वाले आवेदक योजना के पात्र हैं।लाभार्थियों को 7 प्रतिशत ब्याज अनुदान अधिकतम 5 वर्षों तक प्रदान किया जाता है।
मुख्यमंत्री अनुसूचित जाति विशेष परियोजना वित्त पोषण योजना
योजना के माध्यम से बड़े स्तर की परियोजनाओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है। पात्र हितग्राहियों को 2 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। योजना विभिन्न विभागों के समन्वय से संचालित होकर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देती है और स्वरोजगार के नए अवसर सृजित करती है।
सावित्री बाई फुले स्व-सहायता समूह योजना
यह विशेष केंद्रीय सहायता योजना, अनुसूचित जाति वर्ग की बी.पी.एल. श्रेणी की 18 से 55 वर्ष आयु की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए यह योजना संचालित है, जिसमें 5 से 10 महिलाओं के स्व-सहायता समूह बनाकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा जाता है। समूहों को विभिन्न उद्यम स्थापित करने के लिए सहायता दी जाती है। योजना में प्रत्येक हितग्राही को 2 लाख रुपये तक का बैंक ऋण उपलब्ध कराने और प्रति समूह 10 हजार रुपये अनुदान देने का प्रावधान है। मंत्री चौहान ने कहा कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता है कि इन योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे और अनुसूचित जाति वर्ग के प्रत्येक युवा को आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिले।

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