नई दिल्ली
कैश कांड में घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच कमेटी में बड़ा बदलाव हुआ है. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने जस्टिस यशवंत वर्मा को हटाने के कारणों की जांच के लिए बनाई गई तीन सदस्यों वाली कमेटी का पुर्नगठन किया है. यह कैश कांड वाला यह मामला पिछले साल मार्च में जस्टिस यशवंत वर्मा के राजधानी स्थित आवास से जली हुई नकदी मिलने से जुड़ा है. तब जस्टिस यशवंत वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट में तैनात थे.
दरअसल, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने बुधवार को जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच करने वाली तीन सदस्यों वाली कमेटी में बदलाव किया है. यह कमेटी ‘कैश कांड’ के आरोपों की जांच कर रही है, जिसमें जस्टिस वर्मा के दिल्ली आवास से जले हुए नोटों के बंडल मिलने का मामला है. मूल कमेटी पिछले साल अगस्त में बनी थी. मगर अब इसमें एक नए सदस्य की एंट्री हुई है. यह बदलाव इसलिए हुआ क्योंकि पुरानी कमेटी के एक सदस्य जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव 6 मार्च को रिटायर हो रहे हैं. अब नई कमेटी ही इस कांड की जांच आगे बढ़ाएगी और रिपोर्ट देगी.
कमेटी में कौन-कौन?
यह कमेटी पिछले साल मार्च में जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से जले हुए कैश के बंडल मिलने के बाद उन्हें हटाने की मांग के तहत की गई थी. इस कमेटी में ये तीन सदस्य हैं- जस्टिस अरविंद कुमार, सुप्रीम कोर्ट ऑफ़ इंडिया; जस्टिस चंद्रशेखर, चीफ जस्टिस ऑफ द बॉम्बे हाईकोर्ट; और बी.वी. आचार्य, सीनियर एडवोकेट, कर्नाटक हाईकोर्ट. जस्टिस अरविंद कुमार और आचार्य पिछली कमेटी का भी हिस्सा थे, लेकिन जस्टिस चंद्रशेखर नए सदस्य हैं. उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव की जगह ली है.
कैसे बनी थी यह कमेटी
यह कमेटी जजेस (इंक्वायरी) एक्ट 1968 के तहत बनी है. इसका काम जस्टिस वर्मा को हटाने के आधारों की जांच करना है. पिछले साल 152 सांसदों ने मिलकर इम्पीचमेंट मोशन दिया था, जिसमें विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों के सदस्य शामिल थे. स्पीकर ओम बिरला ने इसे मंजूर किया और कमेटी बनाई. अब पुनर्गठन के बाद कमेटी के सदस्य इस प्रकार हैं:
जस्टिस अरविंद कुमार: जस्टिस अरविंद कुमार सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के जज हैं. वे मूल कमेटी में भी थे और जांच की अगुवाई कर रहे हैं. जस्टिस अरविंद कुमार अनुभवी हैं और कई बड़े मामलों में फैसले दे चुके हैं. उनकी मौजूदगी से जांच निष्पक्ष रहेगी.
जस्टिस श्री चंद्रशेखर: जस्टिस अरविंद कुमार बॉम्बे हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस हैं. यशवंत वर्मा मामले की जांच कमेटी में वे नए सदस्य हैं और जस्टिस मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव की जगह ले रहे हैं. जस्टिस चंद्रशेखर मद्रास हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रह चुके हैं और कानूनी मामलों में विशेषज्ञ हैं. उनका आना कमेटी को और मजबूत बनाएगा.
बी.वी. आचार्य: बी.वी. आचार्य कर्नाटक हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट हैं. वे भी मूल कमेटी के सदस्य हैं. आचार्य सीनियर वकील हैं और कई हाई-प्रोफाइल मामलों में शामिल रहे हैं. उनकी कानूनी समझ जांच में मदद करेगी.
क्या है जस्टिस वर्मा कैश कांड?
कैश कांड मार्च 2025 की घटना है. होली के मौके पर जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लगी थी. फायर ब्रिगेड ने आग बुझाते समय जले हुए और आंशिक रूप से जले नोटों के बंडल पाए थे. यह कैश लाखों या करोड़ों का बताया गया, लेकिन इसका कोई रिकॉर्ड नहीं था. जस्टिस यशवंत वर्मा उस समय भोपाल में थे और उन्होंने कहा कि यह कैश उनका नहीं है. इसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें काम से हटा दिया और जांच शुरू हुई. बाद में उनका ट्रांसफर इलाहाबाद हाईकोर्ट कर दिया गया. यह कांड भ्रष्टाचार के आरोपों से जुड़ा है और न्यायपालिका में पारदर्शिता पर सवाल उठाता है. फिलहाल, इसकी जांच जारी है.

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