भुवनेश्वर
भाजपा सांसद बैजयंत पांडा ने महिला और उसके परिवार से मुलाकात की। उनका हालचाल लिया और साथ में फोटो खिंचवाई। इस मामले की तारीफ हो रही है और कहा जा रहा है कि शांति से किसी विवाद को निपटाने का इससे बेहतर तरीका कोई दूसरा नहीं हो सकता। देश में अकसर ऐसे मामले सामने आते हैं, जब समाज में भेदभाव की शिकायत होती है। इस तरह की घटनाओं में आमतौर पर विवाद को बयानबाजी करके और बढ़ा दिया जाता है। लेकिन ओडिशा के भाजपा सांसद बैजयंत पांडा की तारीफ की जा रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने एक दलित महिला के हाथ का बना खाना खुद जाकर खाया। ऐसा कदम उन्होंने तब उठाया, जब दलित महिला के हाथ का बना खाने को लेकर विवाद था और कुछ लोग खाने में ऐतराज कर रहे थे। ऐसे में विवाद ना बढ़े और समाज में वैमनस्य को रोका जा सके। इस इरादे से पांडा उस आंगनवाड़ी केंद्र पहुंच गए, जहां महिला काम करती है।
उनके साथ तमाम समर्थक और गांव के लोग भी थे। उन्होंने महिला और उसकी बहन के हाथों का बना खाना खाया। पांडा ने महिला और उसके परिवार से मुलाकात की। उनका हालचाल लिया और साथ में फोटो खिंचवाई। इस मामले की तारीफ हो रही है और कहा जा रहा है कि शांति से किसी विवाद को निपटाने का इससे बेहतर तरीका कोई दूसरा नहीं हो सकता। यह मामला राजनगर के गड़ियामल ग्राम पंचायत के नुआगांव आंगनवाड़ी केंद्र का है। यहां आंगनवाड़ी में काम करने वाली दलित महिला के हाथों का खाना बच्चों को दिए जाने पर कुछ ग्रामीणों ने ऐतराज जताया था। इसे लेकर विवाद बढ़ रहा था।
ऐसी स्थिति में बैजयंत पांडा खुद ही आंगनवाड़ी पहुंचे और खाना खाया। भाजपा सांसद अपने साथ कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को लेकर पहुंचे थे। इस मौके पर बड़ी संख्या में ग्रामीण भी जुट गए थे। उनके इस कदम को एकता और सौहार्द्र के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है। यही नहीं उनके इस कदम के बाद गांव के लोगों के व्यवहार में भी सुधार आया है। सोमवार को बच्चे आंगनवाड़ी पहुंचे तो उसी दलित महिला के हाथ का बना खान खाया, जिसे लेकर विवाद था। इसकी तस्वीरें भी बैजयंत पांडा ने सोशल मीडिया पर शेयर की हैं। आंगनवाड़ी वर्कर शर्मिष्ठा सेठी ने कहा कि सांसद ने चावल, दाल, खट्टा और सब्जियां खाईं। इस खाने को मैंने और मेरी बहन ने ही तैयार किया था। सांसद ने खाने की तारीफ भी की।
बैजयंत पांडा ओडिशा की केंद्रपाड़ा सीट से लोकसभा के सांसद हैं। वह जब आंगनवाड़ी केंद्र में खाने के लिए बैठे तो उनके साथ शशांक सेठी, संजय राठ, किशोर पांडा जैसे नेता भी खाने के लिए पहुंचे। सांसद के इस व्यवहार की आसपास के लोग तारीफ कर रहे हैं कि कैसे उन्होंने एक विवाद को टाल दिया और समाज में भी एकता का संदेश दिया।

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