आमतौर पर शर्म को महिलाओं का गहना कहा जाता है। लेकिन बिना वजह की शर्म, महिला हो या पुरुष, दोनों के लिए ही गुण बनने की जगह कई बार असफलता की वजह बन जाती है। जीवन में कई बार व्यक्ति सिर्फ संकोच में आकर कुछ ऐसी चीजों को करने में शर्म महसूस करता है, जो उसकी सफलता की राह को और अधिक दूर कर देती है। आज सिर्फ महिलाएं ही नहीं, बल्कि पुरुष भी कुछ बातों को लेकर शर्म महसूस करते हैं। ऐसे में चाणक्य ने अपने नीतिशास्त्र में मानव जीवन की सफलता के लिए कई बहुमूल्य सुझाव दिए हैं। उन्होंने बताया है कि पुरुषों और महिलाओं को किन 3 बातों के लिए बिल्कुल भी शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए।
धन कमाने में
आचार्य चाणक्य के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति धन के लेन-देन में शर्म महसूस करता है, तो उसे धन की हानि हो सकती है। व्यक्ति को धन कमाने के लिए किसी भी छोटे-बड़े कार्य को करने में शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए। आचार्य चाणक्य का मानना था कि धन से जुड़े मामलों में संकोच करने से व्यक्ति को नुकसान हो सकता है, जैसे कि उधार दिए हुए पैसे वापस मांगने में संकोच करना या धन उधार लेने में शर्म करना, दोनों ही सूरतों में व्यक्ति को नुकसान हो सकता है। याद रखें, एक अच्छे, आरामदायक और समृद्ध जीवन के लिए हर व्यक्ति को धन की आवश्यक पड़ती है। व्यक्ति की हर जरूरत सीधे तौर पर धन से जुड़ी हुई होती है।
शिक्षा लेने में
शिक्षा प्राप्त करने में भी व्यक्ति को कभी शर्म महसूस नहीं करनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति कुछ नया सीखने में संकोच करता है, तो वह हमेशा अज्ञानी ही रह जाएगा। इसलिए, कभी भी अपने गुरु से प्रश्न पूछने में संकोच न करें। किसी भी तरह का संदेह मन में उठते ही उसे तुरंत समझने के लिए प्रश्न पूछें।
भोजन
कई लोग सार्वजनिक रूप से भोजन करने में शर्म महसूस करते हैं। लेकिन भूख मिटाना व्यक्ति का अधिकार और एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। आपको जब भूख लगे तभी खाएं और अपने बगल में बैठे लोगों की चिंता न करें। याद रखें, यदि आप भोजन करने में शर्म महसूस करेंगे, तो आप भूखे रह सकते हैं।

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