नई दिल्ली
सनातन धर्म को खत्म करने की बात करने वाले तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि झुकने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने गुरुवार को कहा कि मैं इस मामले में सारे मुकदमों का कानूनी तौर पर सामना करने के लिए तैयार हूं। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी एंड कंपनी सनातन के मुद्दे का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि मणिपुर हिंसा, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों से ध्यान भटकाया जा सके। हालांकि इस बीच उनके तेवरों में थोड़ी नरमी भी आई है। उन्होंने सफाई देने के अंदाज में कहा, 'हर कोई जानता है कि हम किसी भी धर्म के दुश्मन नहीं हैं।'
उदयनिधि ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू और मलेरिया से करते हुए कहा था कि जिससे समाज में गैरबराबरी फैलती हो, वैसा धर्म खत्म ही हो जाना चाहिए। उनके बयान पर तमिलनाडु से लेकर दिल्ली तक जमकर बवाल मचा है। इसके बाद भी उन्होंने माफी नहीं मांगी थी और कहा कि मैंने जो भी कहा था, उस पर कायम हूं। मैं अपने बयान को बार-बार दोहराता हूं। इस मसले पर राजनीति भी दो हिस्सों में बंटती दिखी। भाजपा ने तीखा विरोध किया तो वहीं कांग्रेस, AAP जैसी पार्टियों ने उनके बयान से पल्ला झाड़ा। वहीं इन्हीं दलों के कई नेताओं ने ऐसे बयान भी दिए, जिससे विवाद और गहराता दिखा।
जैसे कांग्रेस के ही केसी वेणुगोपाल ने उदयनिधि के बयान को उनकी निजी राय और अभिव्यक्ति की आजादी बता दिया। जबकि आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी और AAP लीडर राजेंद्र पाल गौतम ने भी सनातन धर्म को भेदभाव करने वाला बताया और कहा कि ऐसा धर्म तो खत्म ही हो जाना चाहिए। इन बयानों के चलते भाजपा आक्रामक है और INDIA गठबंधन को सनातन विरोधी बता रही है। वहीं इसमें शामिल शिवसेना पसोपेश की स्थिति में है। उसके नेता संजय राउत ने कहा कि देश में 90 करोड़ हिंदू हैं और उनकी आस्था का अपमान नहीं होना चाहिए।

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