पेशावर
पाकिस्तान में आसिम मुनीर को भारत के ऑपरेशन सिंदूर में मात खाने के बाद फील्ड मार्शल बनाया गया है। इसके अलावा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का दर्जा भी संविधान संशोधन करके मिला है। जानकार मानते हैं कि पाकिस्तान ने ऐसा इसलिए किया है ताकि भारत से मिली हार को छिपाया जा सके और जनता में गलत जानकारी देकर ही सही, सेना और सरकार का भरोसा कायम रहे। फिर भी इमरान खान के नेतृत्व वाली विपक्षी पार्टी पीटीआई से सेना की अदावत जारी है। यहां तक कि गुरुवार को तो खैबर पख्तूनख्वा की विधानसभा में आसिम मुनीर के पोस्टर लहराए जाने पर विवाद छिड़ गया।
इसके अलावा पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता की ओर से इमरान खान और खैबर के सीएम सोहैल आफरीदी के खिलाफ बयान देने पर भी विवाद मचा है। सदन में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज की महिला विधायक सोबिया शाहिद ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के पोस्टर लहराए। इस पर स्पीकर सुरैया बीबी ने मार्शलों को आदेश दिया कि वे आसिम मुनीर के पोस्टरों को हटाएं। इसके अलावा उन्होंने पीएमएल-एन की विधायक से भी कहा कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ सेना का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनका आपकी पार्टी से कोई ताल्लुक नहीं है। उन्होंने कहा कि आप अपनी परफॉर्मेंस के बारे में बात करें। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की तस्वीरें लहराने का क्या मतलब है।
वहीं पीटीआई के विधायकों ने कहा कि इस देश में गंभीर समस्याएं हैं। गरीबी, आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता है। इसके बाद भी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी पीटीआई नेतृत्व के खिलाफ बयान देते हैं। विशेष तौर पर इमरान खान और सीएम सोहैल आफरीदी के खिलाफ उन्होंने जो बोला है, उससे खैबर पख्तूनख्वा के लोगों में गुस्सा है। पीटीआई के विधायक हुमायूं खान ने कहा कि आखिर सेना के लोगों को राजनीतिक मसले में बोलने की क्या जरूरत है। खान ने कहा कि कुछ लोग यहां राष्ट्रपति शासन लगवाने की बात भी कर रहे हैं, लेकिन खैबर पख्तूनख्वा में इससे संकट ही पैदा होगा और लोग ऐसी स्थिति को स्वीकार नहीं करेंगे।

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