दिल्ली धमाका-अब तक 7 आरोपी गिरफ्तार, अब एनआईए करेगी जांच

नई दिल्ली। पिछले महीने 10 नवंबर को लाल किले के पास हुए भीषण कार बम विस्फोट को मंगलवार को ठीक एक महीना पूरा हो गया। इस आतंकी हमले में 15 लोग मारे गए थे और 20 से ज्यादा घायल हुए थे, लेकिन अब तक अदालत में मुख्य मुकदमे की शुरुआत भी नहीं हो पाई है। पटियाला हाउस कोर्ट में केवल आरोपियों की रिमांड बढ़ाने और जमानत याचिकाओं पर ही सुनवाई चल रही है। शुरुआत में जांच दिल्ली पुलिस के स्पेशल सेल के पास थी, लेकिन 18 नवंबर को गृह मंत्रालय ने इसे राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दिया। एनआईए ने अब तक सात प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें कथित मास्टरमाइंड और विस्फोटक जुटाने वाले शामिल हैं। सभी आरोपी फिलहाल एजेंसी की हिरासत में हैं।

जांच में पता चला है कि यह एक सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल की साजिश थी। इसमें कश्मीर और फरीदाबाद के कुछ डॉक्टरों व धार्मिक व्यक्तियों का नेटवर्क शामिल था। हमले में प्रयुक्त हुंडई आई 20 कार में अमोनियम नाइट्रेट भरा गया था और पुलवामा निवासी मुख्य संदिग्ध डॉ. उमर उन-नबी खुद को उड़ा लेने वाला आत्मघाती हमलावर था। जांच में विदेशी हैंडलर्स के लिंक भी सामने आए हैं। हालांकि अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और जटिल तकनीकी साक्ष्यों के कारण चार्जशीट दाखिल करने में अभी समय लग रहा है।

कानूनी प्रावधान के तहत 90 दिन की समय-सीमा होती है, यानी अभी कम से कम दो महीने और लग सकते हैं। इस देरी से पीड़ित परिवारों में भारी आक्रोश है। मृतकों के परिजनों ने कहा, हमारे बच्चे की लाश भी पूरी नहीं मिली थी। एक महीना बीत गया, लेकिन न्याय की कोई किरण नजर नहीं आ रही। आरोपी जेल में आराम से हैं, जबकि हम दर-दर भटक रहे हैं। वकीलों का कहना है कि तकनीकी जांच पूरी होने तक चार्जशीट दाखिल होना मुश्किल है, जिससे पीड़ितों का गुस्सा और बढ़ रहा है।