नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार को दो दिवसीय दौरे पर भारत पहुंच रहे हैं। पुतिन की यात्रा को लेकर पूर्व भारतीय राजनयिकों का मानना है कि परमाणु प्लांट से जुड़े विषय, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और तकनीक के अलावा पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच द्विपक्षीय वार्ता में यूक्रेन युद्ध पर भी चर्चा हो सकती है। पूर्व राजनयिक अनिल त्रिगुणायत ने कहा कि रूस हर मुश्किल वक्त में भारत के साथ खड़ा रहा है। इस कड़ी में 25 साल पहले यह तय हुआ कि समय-समय पर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ताएं होंगी। उसी आधार पर पुतिन भारत आ रहे हैं।
मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक अनिल त्रिगुणायत ने कहा कि पिछले 25 सालों में भारत-रूस संबंध बहुत मजबूत हुए हैं। पीएम मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच आपसी समझ भी काफी अच्छी है। रूस-यूक्रेन युद्ध पर त्रिगुणायत ने कहा कि संभावना है कि पुतिन बातचीत में पीएम मोदी से यूक्रेन के विषय पर बात कर सकते हैं। पीएम मोदी ने हमेशा युद्ध विराम की बात की है। रूस-यूक्रेन की लड़ाई इसलिए चिंताजनक है, क्योंकि इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है।
त्रिगुणायत ने कहा कि एनर्जी सिक्योरिटी में रूस की बहुत बड़ी भूमिका है। उसके चलते भारत के ऊपर कुछ अतिरिक्त शुल्क भी लगा है। हालांकि, भारत ने इतना ध्यान नहीं दिया है। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि द्विपक्षीय वार्ता में इस पर भी चर्चा हो सकती है। अगर रूस अपने सरप्लस को रणनीतिक तरीके से भारत में निवेश करना चाहे तो वह उसके लिए बहुत बड़ा अवसर है। इसी तरह भारतीय कंपनियों के लिए भी यह बड़ा मौका है। कंपनियों को भी सामरिक रिश्तों का लाभ उठाना चाहिए।
पूर्व राजनयिक वीना सिकरी ने कहा कि ऐसा लगता है कि पुतिन का यह एक बहुत ही अहम दौरा है। इसके पीछे कई कारण हैं। दुनिया भर में जियोपॉलिटिकल हालात बहुत नाजुक हैं। दो युद्ध चल रहे हैं, जो अभी खत्म नहीं हैं, बल्कि तनाव बना हुआ है। इसके अलावा भारत पर अमेरिका की तरफ से ज्यादा टैरिफ को लेकर काफी दबाव है, जिसका ज्यादातर हिस्सा उस एनर्जी से जुड़ा है जो भारत रूस से खरीद रहा है। सिकरी ने कहा कि रूस की ओर से विकसित सुखोई-57 स्टील्थ फाइटर जेट बहुत अहम है और भारत सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है।

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