बेंगलुरु। कर्नाटक की सियासत में शनिवार का दिन बेहद निर्णायक साबित हुआ। सत्तारूढ़ कांग्रेस में मुख्यमंत्री पद को लेकर पिछले कई महीनों से चल रही रस्साकशी के बीच मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने आज सुबह सीएम आवास पर नाश्ते के दौरान करीब एक घंटे तक मुलाकात की। इस बैठक में मुख्यमंत्री के कानूनी सलाहकार व वरिष्ठ वकील ए.एस. पोन्नाना भी मौजूद रहे।
सरकार के ढाई साल पूरे होने के ठीक बाद 20 नवंबर से ही शिवकुमार खेमे में बेचैनी बढ़ गई थी। उनके समर्थक विधायक लगातार बयान दे रहे थे कि अब समझौते के मुताबिक सत्ता हस्तांतरण का समय आ गया है। आज की बैठक के बाद शिवकुमार के आज ही या कल दिल्ली जाने की संभावना है। दिलचस्प है कि उनके छोटे भाई व पूर्व सांसद डी.के. सुरेश पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं और आलाकमान से मुलाकात कर रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह नाश्ते की बैठक सत्ता के संतुलन को बनाए रखने की आखिरी कोशिश हो सकती है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह मुलाकात मौजूदा तनाव को शांत कर पाएगी या आने वाले दिनों में कर्नाटक कांग्रेस में और बड़ी उथल-पुथल देखने को मिलेगी।
सियासी हलकों में चर्चा है कि इस बंद कमरे की बैठक में डी.के. शिवकुमार ने मई 2023 में सरकार गठन के समय दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान सोनिया गांधी, राहुल गांधी व मल्लिकार्जुन खरगे से हुए उस कथित समझौते का जिक्र किया, जिसमें 2.5 साल बाद मुख्यमंत्री पद उन्हें सौंपने की बात कही गई थी। शिवकुमार के करीबी विधायकों व नेताओं ने पिछले कुछ दिनों से उन पर भारी दबाव बनाया हुआ है कि वे अब खुलकर यह मुद्दा उठाएं।

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