केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी के गृहनगर विदिशा से मानवता को झकझोर देने वाला वीडियो वायरल
अशरफ अली
भोपाल/विदिशा। मध्य प्रदेश के विदिशा जिले से मानवता को शर्मसार करने वाला एक वीडियो सामने आया है। वीडियो में एक मासूम बच्ची सडक़ किनारे कचरे के ढेर से जूठन बटोरकर खाती नजर आ रही है। यह दृश्य न केवल दिल दहला देने वाला है, बल्कि सरकारी तंत्र की उदासीनता और समाज की संवेदनहीनता पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है।
यह वीडियो विदिशा शहर के गांधी नगर क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां बच्ची किसी होटल या घर से फेंके गए बचे हुए खाने को तलाशती दिखती है। वीडियो बनाने वाले राहगीर ने यह दृश्य देखकर भावुक होकर इसे सोशल मीडिया पर साझा कर दिया। कुछ ही घंटों में वीडियो वायरल हो गया और पूरे प्रदेश में आक्रोश फैल गया।
विडंबना यह है कि यह घटना केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के संसदीय क्षेत्र और नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी के गृह नगर विदिशा की है। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि जिस शहर को ‘बाल अधिकारों की राजधानी’ कहा जाता है, वहां अगर एक बच्ची भूख मिटाने के लिए कचरे में भोजन ढूंढने को मजबूर है, तो विकास और कल्याण के सारे सरकारी दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
प्रशासन हरकत में, जांच के आदेश
वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया। विदिशा कलेक्टर ने कहा कि वीडियो की सत्यता की जांच की जा रही है और बच्ची व उसके परिवार का पता लगाने के प्रयास जारी हैं ताकि उन्हें तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके। नगर पालिका और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीमें भी सक्रिय की गई हैं। हालांकि दूसरे दिन तक भी प्रशासनिक टीमें बच्ची को ढूंढने में लगी रहीं, लेकिन खबर लिखे जाने तक उसका सुराग नहीं मिल पाया था।
मामले पर सियासत गरमाई
इधर, इस मामले पर राजनीति गर्माने लगी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि जहां सरकार ‘लाडली बहना’ और ‘पोषण अभियान’ के दावे करती है, वहीं एक बच्ची कचरे में जूठन खोजने को मजबूर है। यह तस्वीर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के विदिशा और मप्र को शर्मसार करती है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि वह गरीबी और मानवीय पीड़ा का राजनीतिकरण कर रही है। स्थानीय समाजसेवी संगठनों ने भी इस घटना पर गहरी चिंता जताई है। नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा-जब तक हर बच्चे के लिए भोजन और सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, तब तक विकास अधूरा है। यह दृश्य हमें शर्मिंदा करता है।

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