भोपाल। राज्य सरकार राजधानी के गोविंदपुरा इंडस्ट्रियल एरिया के विस्तार के लिए देश की नवरत्न कंपनियों में से एक भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड (बीएचईएल) की खाली पड़ी जमीन वापस लेने की तैयारी कर रही है। राज्य सरकार भेल के कब्जे से 1 हजार 146 हेक्टेयर जमीन को वापस लेने की तैयारी कर रही है। जिला प्रशासन ने यह जमीन चिह्नित भी कर ली है। यह जमीन सालों से बीएचईएल के कब्जे में है, लेकिन जिला प्रशासन के रिकॉर्ड में यह अब भी राजस्व के नाम दर्ज है। हालांकि इसको लेकर बीएचईएल ने आपत्ति जताई है।
बीएचईएल की भोपाल में स्थापना साल 1964 में हुई थी। इसके पहले केन्द्र सरकार ने बीएचईएल को 1959 से 1962 के बीच करीबन 6 हजार एकड़ जमीन आवंटित की थी। हालांकि अब जिला प्रशासन का कहना है कि बीएचईएल के अन्ना नगर से सटी और दूसरे स्थानों पर 1 हजार 146 हेक्टेयर जमीन चिह्नित की गई है। यह जमीन राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज है। भोपाल कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह के मुताबिक चिह्नित की गई 1 हजार 146 हेक्टेयर भूमि कभी बीएचईएल को आवंटित ही नहीं की गई थी। 1960 में बीएचईएल को जो जमीन आवंटित की गई थी, उसमें उक्त भूमि का कहीं भी उल्लेख ही नहीं है।
गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार की तैयारी
भोपाल के बीचोंबीच स्थित गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र के विस्तार को लेकर राज्य सरकार जमीन तलाश कर रही है। हाल ही में एमएसएमई के कार्यक्रम में गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र के पदाधिकारी ने मुख्यमंत्री के सामने उद्योगों के विस्तार के लिए जमीन आवंटित किए जाने जाने का मुद्दा उठाया था। मुख्यमंत्री ने भरोसा दिलाया था कि जल्द ही औद्योगिक क्षेत्र के पास ही जमीन का इंतजाम किया जाएगा। माना जा रहा है कि खाली होने वाली जमीन पर औद्योगिक क्षेत्र के रूप में उपयोग किया जाएगा।
बीएचईएल ने जताई आपत्ति, कमेटी गठित
उधर, जिला प्रशासन के दावे पर बीएचईएल प्रबंधन ने आपत्ति जताई है। बीएचईएल ने कहा है कि ये जमीन 1962 से ही उसके कब्जे में रही है। उधर जमीन को लेकर उपजे विवाद को देखते हुए मुख्य सचिव अनुराग जैन ने नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की है। कमेटी ने भोपाल कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह और भेल प्रबंधन से आवंटित की गई जमीन के दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए कहा है।

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