नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने एक ऐतिहासिक फैसला दिया है। इस फैसले में कहा गया है, देश की कोई भी जांच एजेंसी किसी भी वकील को तब तक तलाब नहीं कर सकती है। जब तक पुलिस अधीक्षक से लिखित अनुमति ना ले ली जाए।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई न्यायमूर्ति विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एनबी अंजरिया की खंडपीठ ने आदेश जारी किया है। यह आदेश ईडी द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार और प्रताप वेणुगोपाल को भेजे गए समन मामले की सुनवाई करने के बाद दिया है। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा है, वकीलों को तलब करना मुविक्कलों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। खंड पीठ ने अपने आदेश में कहा, वकील को तभी बुलाया जा सकता है। जब मामला भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 132 के अंतर्गत जरूरी हो। इसे कार्यवाही में शामिल किया जाना चाहिए। डिजिटल उपकरणों की जांच के दौरान आरोपी की गोपनीयता के साथ समझौता नहीं किया जा सकता है।

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