मनुष्य शरीर में स्थित सूक्ष्म सात शरीरों में यानी सात चक्रों के संसार में स्वाधिष्ठान चक्र का स्थान दूसरा है। इसको 6 पंखुडिय़ों वाले एक कमल से दर्शाया जाता है। जिसका रंग नारंगी है। हमारे शरीर में यह हमारी नाभि से लगभग 4 अंगुल नीचे होता है। यह भावनाओं से, भौतिक इच्छाओं से और वासनाओं से संबंधित है। स्वाधिष्ठान चक्रजागृत करने के कई तरीके है। जैसे-जैसे यह चक्र जागृत होता चला जाता है आपके पास शक्तियां आनी शुरू हो जाती है। यह दैवीय शक्तियां धीरे-धीरे आपके जीवन में अपना प्रभाव दिखाना शुरू करती है। धीरे-धीरे चक्र की जागृति की गति के हिसाब से ही इन दिव्य शक्तियों की संख्या बढऩी शुरू होती है। इसको आकाशीय प्रकाश से भी जागृत किया जाता है। सब कुछ एकाग्रता पर निर्भर करता है। जितनी एकाग्रता से आप नारंगी रंग की आकाशीय ऊर्जा को अपने स्वाधिष्ठान चक्र पर लेकर आयेंगे उतनी तेजी से यह चक्र जागृत होना शुरू होगा।
एक बार जब स्वाधिष्ठान चक्र जागृत हो जाएगा तो इसके कमल पर सुप्त पड़ी 6 शक्तियां भी अपने आप जागृत हो जाएंगी। एक समय ऐसा भी आएगा जब यह दिव्य शक्तियां आपको अपने चारों ओर दिखाई देना भी शुरू हो जाएगी। अभी हो सकता है कि आपको मेरी बात सुन कर डर लग रहा हो। लेकिन जब आपका स्वाधिष्ठान चक्र जागृत हो चुका होगा और यह शक्तियां आपके समक्ष होगीं तो आपको डर नहीं लगेगा। यह शक्तियां आपके व्यक्तित्व को मजबूत कर देंगी। आपके औरा को मजबूत कर देंगी। यह आपके जीवन में धन की कोई भी कमी नहीं आने देंगी। आपके पारिवारिक या सामाजिक संबंध यदि बिगड़े हुये हैं तो वो भी अपने आप सही होंने लगेंगे। आपकी वाणी शुद्ध, निर्मल और आकर्षक हो जाएगी। लोग आपकी वाणी और आपकी तरफ आकर्षित होने लगेंगे। लेकिन इस तरह की शक्तियां हांसिल होने में समय लगता है। अगर आप इन शक्तियों का व्यक्तिगत प्रयोग नहीं करते तो फिर यह शक्तियां कुंडलिनी जागरण में सहायक बन जाती है। इसलिए साधक इन शक्तियों का प्रयोग व्यक्तिगत न करके कुंडलिनी साधना में करते है।

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