February 18, 2026

लव जिहाद के खिलाफ असम में बनेगा कानून, बहुविवाह प्रथा पर कसेगा शिकंजा

गुवाहाटी। असम में लव जिहाद पर लगाम लगाने के लिए कानून तैयार किया जा रहा है साथ ही बहु विवाह जैसी परंपराओं पर भी शिकंजा कसने की तैयारी चल रही है। इसके लिए आगामी विधानसभा सत्र में बिल लाने की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की सरकार अगले सत्र में इन दोनों पर विधेयक पेश करने जा रही है। सीएम सरमा ने बताया, अगला विधानसभा सत्र ऐतिहासिक होगा क्योंकि कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे। बहुविवाह प्रथा और लव जिहाद पर प्रतिबंध के साथ-साथ हमारे सत्रों का संरक्षण, चाय बागानों के श्रमिकों को भूमि अधिकार देने सहित अन्य विधेयक शामिल हैं।

मुख्यमंत्री सरमा ने बताया कि इस विधेयक के तहत एक आयोग स्थापित किया जाएगा, जो सत्र भूमि को अतिक्रमण और विवादों से बचाएगा। पारदर्शी सरकार और विरासत पर्यटन व सत्र कला के माध्यम से सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देगा। विधेयक के अनुसार आयोग के तहत सत्रों की सांस्कृतिक विरासत को डिजिटल संग्रह के माध्यम से सुरक्षित किया जाएगा, जिसमें भूमि, कलाकृतियां और पांडुलिपियों का विवरण होगा, जो वैश्विक स्तर पर उनकी पहुंच और संरक्षण सुनिश्चित करेगा।

उन्होंने बताया कि अगले विधानसभा सत्र में हम लव जिहाद, बहुविवाह और सत्र संरक्षण के खिलाफ कई नए विधेयक लाएंगे। चाय बागानों के श्रमिकों के भूमि अधिकारों पर चर्चा के साथ ही और भी कई विधेयक पेश किए जाएंगे। असम कैबिनेट ने पहले ही असम सत्र संरक्षण और विकास बोर्ड विधेयक, 2025 को मंजूरी दी है। यह एक निकाय होगा, जिसका उद्देश्य सत्रों और उनके भूमि-संपत्ति का संरक्षण, प्रबंधन, रखरखाव और सतत विकास सुनिश्चित करना है। असम के सत्रह वैष्णव मठ हैं, जो धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक जीवन के महत्वपूर्ण केंद्र हैं। इनकी स्थापना 16वीं सदी में हुई थी। आयोग का अध्यक्ष हाईकोर्ट से सेवानिवृत्त न्यायाधीश होंगे। सदस्य सचिव भूमि अधिग्रहण और सुधार निदेशक, असम होंगे। इसके अलावा, दो सदस्य राज्य सरकार द्वारा नामांकित सत्र संस्थानों के प्रतिनिधि होंगे और एक सदस्य भूमि प्रशासन में अनुभवी सेवानिवृत्त सिविल सेवा अधिकारी (सचिव स्तर या उससे ऊपर) होगा।