February 18, 2026

अखिलेश बोले-हमें दीयों-मोमबत्तियों पर इतना खर्च क्यों करना पड़ता है, क्रिसमस से सीखो

लखनऊ। दीपावली पर पूरे देश में रोशनी और उल्लास का माहौल है। लोग घरों को दीपों की माला और चित्ताकर्षक रोशनी से सजा रहे हैं वहीं अयोध्या में भी लाखों दीये जलाने की तैयारियां है। इसी बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व सीएम अखिलेश यादव के बयान से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है। उन्होंने कहा कि हमें दीयों और मोमबत्तियों पर इतना खर्च क्यों करना पड़ता है, जबकि कई देशों में क्रिसमस में शहर महीनों तक जगमगाते रहते हैं। हमें क्रिसमस से सीखना चाहिए। उन्होंने साथ ही लखनऊ की सफाई और ट्रैफिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए।

अखिलेश यादव अक्सर हिंदू परंपराओं को लेकर ऐसी टिप्पणियां करते हैं। अयोध्या में दीपोत्सव अब एक सांस्कृतिक प्रतीक बन चुका है। पिछले कुछ सालों में लाखों दीयों से शहर को जगमगाकर विश्व रिकॉर्ड कायम किए गए हैं। ऐसे समय में अखिलेश का बयान एक काउंटर नैरेटिव के रूप में देखा जा रहा है। आलोचकों का मानना है कि यदि वे वाकई में बिजली बचत या शहर की सफाई पर चर्चा करना चाहते, तो किसी भी सामान्य दिन यह मुद्दा उठा सकते थे, लेकिन दीपावली से ठीक पहले ऐसा कहना राजनीतिक संदेश देता है। दीया केवल एक लौ नहीं, बल्कि आस्था, आशा और विजय का प्रतीक है। यह उत्सव दिखावे का नहीं, बल्कि अंधकार से प्रकाश की यात्रा का प्रतीक है। जैसे क्रिसमस की सजावट या ईद की रौनक समाज में प्रेम और सौहार्द्र का भाव जगाती है, वैसे ही दीपावली में दीया जलाना आत्मिक और सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। सवाल यह है कि क्या क्रिसमस या ईद पर भी अखिलेश ने कभी ऐसा सवाल उठाया है?