भोपाल। महात्मा गांधी जयंती के सुअवसर पर राज्य सरकार द्वारा मप्र की 16 केंद्रीय, जिला और सब जेलों में विभिन्न जेलों से आजीवन कारावास की सजा से दंडित 111 कैदियों को रिहा करते हुए उन्हें आजादी का तोहफा दिया गया है। रिहा होने वाले बंदियों में 8 महिलाएं भी शामिल हैं। आजीवन कारावास की सजा से दंडित बंदियों को सजा में विशेष माफी प्रदान की गई है। लेकिन आजीवन कारावास से दंडित बंदियों में बलात्कार, पाक्सो आदि प्रकरण वाले दंडित बंदियों को किसी भी प्रकार की माफी नहीं दी गई है।
जेल महानिदेशक डॉ वरूण कपूर के अनुसार मोहन सरकार द्वारा आजीवन सजा काट रहे कैदियों रिहाई नीति में आवश्यक संशोधन किया गया है। अब आजीवन कारावास से दंडित बंदियों को साल में पांच अवसरों पर रिहा किया जाएगा। इससे पहले गणतंत्र दिवस, अंबेडकर जयंती, स्वतंत्रता दिवस एंव गांधी जयंती पर ऐसे बंदियों को रिहा किया जाता था, लेकिन अब राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस (15 नवम्बर) को भी आजीवन कारावास से दंडित बंदियों को पात्रतानुसार रिहा किया जाएगा।
सजा काटते हुये कैदियों ने सीखा हुनर
जेल अधिकारियों के अनुसार रिहा किए जा रहे कैदियों को सजा के दौरान रहते हुए जेल में टेलरिंग, कारपेन्ट्री, लौहारी, भवन मिस्त्री और भवन सामग्री निर्माण आदि का प्रशिक्षण दिया गया है। ताकि रिहा होने के बाद वह अपनी जीवकोपार्जन का साधन अर्जित कर सकें। और पारिवारिक जीवन के निर्वाह में में उन्हें किसी भी तरह की दिक्कतों का सामना न करना पड़े।
किस जेल से कितने कैदी रिहा किये
जानकारी के अनुसार मप्र की केन्द्रीय जेल उज्जैन से 7, केन्द्रीय जेल सतना से 6, केन्द्रीय जेल नर्मदापुरम से 10, केन्द्रीय जेल बड़वानी से 5, केन्द्रीय जेल ग्वालियर से 7, केन्द्रीय जेल जबलपुर से 6, केन्द्रीय जेल रीवा से 12, केन्द्रीय जेल सागर से 18, केन्द्रीय जेल नरसिंहपुर से 5, केन्द्रीय जेल इंदौर से 11, जिला जेल इंदौर से 3, केन्द्रीय जेल भोपाल से 18, जिला जेल अलीराजपुर से 2 बंदियों सहित 111 कैदियों को रिहाई दी गई।

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