नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर और मिग-21 की अंतिम विदाई के साथ तेजी से घटती लड़ाकू विमानों की स्क्वाड्रन की संख्या के बीच गुरुवार का दिन भारतीय वायुसेना के लिए एक बड़ी खुशखबरी लेकर आया। रक्षा मंत्रालय ने वायुसेना के जंगी बेड़े की क्षमता को धार देने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के रक्षा उपक्रम हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ कुल 97 स्वदेशी हल्के लड़ाकू विमानों (एलसीए) तेजस मार्क-1ए की खरीद को लेकर 62 हजार 370 करोड़ रुपए के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। विमानों की वायुसेना को डिलीवरी डेढ़ से दो साल के भीतर वर्ष 2027-28 से शुरू होगी।
रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर यह जानकारी दी है। यहां बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति (सीसीएस) की बैठक में इस मेगा रक्षा खरीद को हरी झंडी प्रदान किए जाने के लगभग एक महीने के बाद मंत्रालय ने एचएएल के साथ इस समझौते पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए हैं। पूर्व में वर्ष 2021 में रक्षा मंत्रालय ने वायुसेना के लिए 83 तेजस मार्क-1ए विमानों की खरीद के लिए एचएएल के साथ 48 हजार करोड़ रुपए का एक समझौता किया था। इसके बाद किया गया यह दूसरा समझौता है।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि 97 में से 68 लड़ाकू विमान और 29 दो सीटों वाले यानी ट्विन सीटर होंगे। समझौते में विमानों के साथ ही संबंधित उपकरणों की खरीद भी शामिल है। तेजस विमानों में 64 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री होगी। जिसमें जनवरी 2021 में हस्ताक्षरित पिछले एलसीए मार्क1 अनुबंध के अलावा 67 अतिरिक्त आइटम शामिल किए जाएंगे। इनमें लगा हुआ उत्तम एक्टिव इलेक्ट्रानिकली स्कैन्ड एरे रडार (एईएसए), स्वयं रक्षा कवच और कंट्रोल सरफेस एक्ट्यूएटर्स जैसी स्वदेशी रूप से विकसित प्रणालियों का एकीकरण आत्मनिर्भरता पहल को और अधिक मजबूत करेगा।
मिग-21 की जगह लेगा तेजस
तेजस मार्क1 ए विमान करीब छह दशक से अधिक की राष्ट्रसेवा के बाद सेवानिवृत्त हो रहे मिग-21 लड़ाकू विमानों की जगह लेंगे। तेजस एक सिंगल इंजन वाला लड़ाकू विमान है। भारतीय वायुसेना इनको अपने युद्धक बेड़े में इसलिए शामिल करने की इच्छुक है, क्योंकि इंजन को छोडक़र ये पूरी तरह से स्वदेशी है। किसी वैश्विक या घरेलू तनाव या विवाद की स्थिति में इसका बड़ा फायदा होगा। साथ ही सरकार की यह खरीद ऐसे वक्त में भी की गई है जब वायुसेना उत्तरी, पश्चिमी और पूर्वी सीमा पर पाकिस्तान और चीन की तरफ से दो मोर्चों पर मिल रही युद्ध की बड़ी चुनौती का सामना भी कर रही है। उसके पास लड़ाकू विमानों की कुल स्क्वाड्रन की संख्या अधिकृत 42 से घटकर 31 स्कवाड्रन पर आ गई है। चीन के साथ भारत के संबंध फिलहाल ठीक हो रहे हैं। लेकिन फौज की तैनाती अभी भी पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर बनी हुई है।

More Stories
मजबूत सुरक्षा सहयोग और टेक्नोलॉजी साझेदारी से भारत-जापान रिश्तों को नई रफ्तार : रिपोर्ट
भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी को नई उड़ान, पीएम मोदी-मैक्रों करेंगे हेलीकॉप्टर असेंबली लाइन का शुभारंभ
टॉलीगंज में लग्जरी रेजिडेंशियल बिल्डिंग में भीषण आग, सड़क पर आए फिल्मी सितारे