February 15, 2026

धर्मांतरण कानून, सुप्रीम कोर्ट ने 8 राज्यों को भेजा नोटिस

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आठ राज्यों को उन याचिकाओं पर जवाब दाखिल करने के लिए कहा है, जिनमें धार्मिक परिवर्तन से संबंधित उनके बनाए कानूनों पर रोक लगाने की मांग की गई है। चीफ जस्टिस बीआर गवई की अगुवाई वाली पीठ ने हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हरियाणा, झारखंड और कर्नाटक के धार्मिक परिवर्तन कानूनों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने राज्यों को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है और कहा कि अगली सुनवाई 6 सप्ताह बाद होगी।

वरिष्ठ अधिवक्ता चंदर उदय सिंह ने कहा कि मामले की तत्काल सुनवाई होनी चाहिए, क्योंकि राज्य इन कानूनों को और सख्त बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि वास्तव में ये अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता को सीमित करते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मंदिरों में भक्त जो पैसा चढ़ाते हैं, वह मैरिज हॉल बनाने के लिए नहीं होता है। कोर्ट ने उस आदेश पर रोक लगाने से भी इनकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि मंदिर फंड को सार्वजनिक या सरकारी धन नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के लिए 19 नवंबर की तारीख तय की है।

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग को समयबद्ध कार्यक्रम का पालन न करने पर फटकारा। कोर्ट ने एक बार की छूट देते हुए सभी स्थानीय निकायों के चुनाव 31 जनवरी 2026 तक कराने का निर्देश दिया और साफ कहा कि आगे कोई विस्तार नहीं दिया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि डीलिमिटेशन की प्रक्रिया 31 अक्टूबर 2025 तक पूरी करनी होगी। इसे चुनाव टालने का आधार नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने असंतोष जताते हुए कहा कि आयोग समय रहते कार्रवाई करने में विफल रहा है। बोर्ड परीक्षा मार्च 2026 में प्रस्तावित हैं, लेकिन यह चुनाव स्थगित करने का कारण नहीं हो सकता।