गयाजी । हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार हर साल पितृपक्ष के 15 दिनों तक लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करते हैं। देशभर में लाखों लोग अपने पितरों की आत्मा की मुक्ति के लिए गयाजी जाते हैं। आमतौर पर पिंडदान किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद होता है, लेकिन भारत में एक और अनोखी परंपरा भी देखने को मिलती है। बिहार के गयाजी स्थित जनार्दन मंदिर में लोग जीते-जी श्राद्ध और पिंडदान करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से पापों से मुक्ति मिलती है और आत्मा को शांति प्राप्त होती है। अब सवाल उठता है कि यह परंपरा क्यों खास है, लोग जीते-जी पिंडदान क्यों करते हैं चलिए बताते हैं।
गयाजी का जनार्दन मंदिर बाकी मंदिरों से बिल्कुल अलग माना जाता है। यह मंदिर भस्मकूट पर्वत पर पत्थरों से बना हुआ है। मंदिर में भगवान विष्णु जनार्दन रूप में विराजमान हैं। आमतौर पर श्राद्ध और पिंडदान मृत व्यक्ति की आत्मा की शांति के लिए होते हैं, लेकिन इस मंदिर की खासियत यह है कि यहां जीवित व्यक्ति स्वयं अपना श्राद्ध और पिंडदान करता हैं। पिंडदान की परंपरा हजारों साल पुरानी है, जो कि आज भी उतनी ही आस्था और श्रद्धा के साथ निभाई जाती है। इसी अनोखी परंपरा के कारण जनार्दन मंदिर श्रद्धालुओं के बीच विशेष रूप से प्रसिद्ध है। खासकर पितृपक्ष के दिनों में यहां भारी भीड़ उमड़ती है।
जनार्दन मंदिर में हर कोई अपना पिंडदान नहीं करता है। यह परंपरा कुछ खास परिस्थितियों में निभाई जाती है। जिन लोगों की कोई संतान नहीं है, या फिर परिवार में पिंडदान करने वाला कोई नहीं है। ऐसे लोग मृत्यु से पहले स्वयं मंदिर में आकर अपना पिंडदान करते हैं। इसके अलावा, कुछ लोग जो परिवार होते हुए भी वैराग्य या संन्यास ले लेते हैं, वे भी मंदिर में आकर अपना पिंडदान करते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से वे जीवन-मरण के बंधन से मुक्त हो जाते हैं और उनकी आत्मा को शांति मिलती है।
कैसे पहुंचे जर्नादन मंदिर
जनार्दन मंदिर तक पहुंचना काफी आसान है, क्योंकि यह प्रमुख परिवहन मार्गों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। इस मंदिर के सबसे पास का बड़ा रेलवे स्टेशन गयाजी जंक्शन है, जो यहां से करीब 10-12 किलोमीटर दूर है। स्टेशन से आप आसानी से ऑटो, टैक्सी या स्थानीय बस लेकर मंदिर पहुंच सकते हैं। निकट गया का अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा बोधगया एयरपोर्ट है, जो मंदिर से लगभग 15-18 किलोमीटर दूर है। एयरपोर्ट से आप टैक्सी या कैब बुक करके सीधे मंदिर जा सकते हैं।ा का अभिन्न हिस्सा है। अब सुप्रीम कोर्ट के इस अंतरिम आदेश के बाद मामले की अगली सुनवाई में कानून की संवैधानिक वैधता पर विस्तृत बहस होगी।

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