मुंबई। महाराष्ट्र में मराठा समुदाय के लिए ओबीसी आरक्षण की मांग को लेकर मनोज जरांगे पाटिल मुंबई के आजाद मैदान में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। मराठा प्रदर्शनकारी छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) से लेकर आसपास के इलाकों में धरना देकर बैठे हैं। जिससे लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा।
इस बीच अभिनेत्री सुमोना चक्रवर्ती ने अब इंस्टाग्राम पर एक लंबा पोस्ट लिखा है। उन्होंने लिखा रविवार (31 अगस्त) दोपहर 12.30 बजे मैं कार से कोलाबा से फोर्ट जा रही थी और अचानक मराठा प्रदर्शनकारियों की भीड़ ने मेरी कार रोक दी। गले में भगवा कपड़ा डाले एक व्यक्ति मेरी कार के बोनट पर धक्का मार रहा था और अजीब तरह से मुस्कुरा रहा था। वह अपनी बढ़ती हुई तोंद मेरी कार पर दबा रहा था। वह मेरे सामने नाचने लगा और उसके अन्य साथी मेरी कार की खिडक़ी के पास आकर जय महाराष्ट्र के नारे लगाते हुए जोर-जोर से हंस रहे थे। हम थोड़ा आगे बढ़े और फिर वही हुआ। यह घटना पाँच मिनट के अंतराल में दो बार हुई। वहाँ कोई पुलिस नहीं थी (जिन्हें हमने देखा वे बस बैठे और बातें कर रहे थे।) कोई कानून-व्यवस्था नहीं थी। दक्षिण मुंबई में दिन के समय मुझे अपनी कार में भी असुरक्षित महसूस हुआ।
पोस्ट में उन्होंने आगे लिखा कि सडक़ें केले के छिलकों, प्लास्टिक की बोतलों, कचरे से भरी थीं। फुटपाथ पर चलने की जगह नहीं थी। आंदोलन के नाम पर, ये प्रदर्शनकारी सडक़ों पर खा पी रहे हैं, सो रहे हैं, नहा रहे हैं, खाना बना रहे हैं, शौचालय जा रहे हैं, वीडियो कॉल कर रहे हैं, रील बना रहे हैं और मुंबई का दौरा कर रहे हैं। वे नागरिक कर्तव्यों का पूरी तरह से मजाक उड़ा रहे हैं। मैंने लगभग अपना पूरा जीवन मुंबई में बिताया है। मैंने हमेशा यहाँ और विशेष रूप से दक्षिण मुंबई में सुरक्षित महसूस किया है। लेकिन आज, इतने सालों में पहली बार, मुझे दिन के समय अपनी कार में भी असुरक्षित महसूस हुआ। लेकिन मैं भाग्यशाली थी, क्योंकि मेरे साथ एक दोस्त था। मैं सोच भी नहीं सकती थी कि अगर मैं अकेली होती तो क्या होता? मैं एक वीडियो बनाना चाहती थी, लेकिन मुझे तुरंत अहसास हुआ कि यह केवल उन्हें प्रोत्साहित करेगा। तो मैंने ऐसा नहीं किया।
सुमोना ने आगे लिखा, यह जानकर डर लगता है कि आप चाहे कोई भी हों, कहीं भी हों, कानून-व्यवस्था पल भर में ध्वस्त हो सकती है। विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण हो सकते हैं। हमने ज़्यादा ज़रूरी कारणों से शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन देखे हैं। हमने ऐसे विरोध प्रदर्शन भी देखे हैं जिन्हें पुलिस ने दबा दिया। लेकिन यहाँ पूरी तरह अराजकता। एक करदाता नागरिक, एक महिला और इस शहर से प्यार करने वाले व्यक्ति के तौर पर, मुझे बहुत असहज महसूस हुआ। हम उन लोगों से कहीं बेहतर के हक़दार हैं जो इस तरह से सरकार और नागरिक जिम्मेदारियों का मज़ाक उड़ाते हैं। हमें अपने शहर में सुरक्षित महसूस करने का हक़ है, उन्होंने इन शब्दों में अपनी भावनाएँ व्यक्त कीं।

More Stories
शाहिद कपूर की फ़िल्म ‘ओ रोमियो’ ने भारतीय बाजार में तीन दिनों में 30 करोड़ की कमाई की
श्वेता त्रिपाठी का बयान: महिलाओं और क्वीर कहानियों का समर्थन करना सही लगता है
बंगाल चुनाव आयोग ने 7 बड़े अधिकारियों को सस्पेंड किया, चुनावी ड्यूटी में कोताही पर सरकार को सख्त निर्देश