February 17, 2026

ऑपरेशन सिंदूर में दखल को न कहा, तो ट्रंप ने भारत पर लगा दिया 50 प्रतिशत टैरिफ

नई दिल्ली। अमेरिकी निवेश बैंक जेफरीज की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह आर्थिक वार किसी व्यापारिक मतभेद की वजह से नहीं, बल्कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की निजी नाराजगी का नतीजा था। मई में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए तनाव (ऑपरेशन सिंदूर) के दौरान ट्रंप ने मध्यस्थता की पेशकश की थी। लेकिन भारत ने इसे सख्ती से ठुकरा दिया था। इसके बाद ही अमेरिका ने भारत पर अभूतपूर्व टैरिफ लगाने का फैसला किया। भारत ने हमेशा साफ किया है कि पाकिस्तान के साथ उसके मसले नो थर्ड पार्टी नीति पर आधारित हैं और किसी भी बाहरी हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है।

अमेरिकी फैसले पर नाराजगी जताते हुये भारत सरकार ने कहा कि किसी एक देश को इस तरह निशाना बनाना अनुचित और अव्यावहारिक है। ट्रंप ने बार-बार यह दावा किया कि उन्होंने कई युद्ध खत्म किए हैं और उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी कैरोलीन लेविट ने भी जुलाई में कहा था, अब समय आ गया है कि ट्रंप को नोबेल पुरस्कार दिया जाए। लेकिन भारत-पाक मुद्दे पर उनका हस्तक्षेप का सपना अधूरा रह गया। इसके बाद ही भारत-अमेरिका व्यापार रिश्तों पर असर पड़ा और ट्रंप ने भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ थोप दिया। रिपोर्ट में कहा गया है कि यह टैरिफ किसी कारोबारी असहमति का परिणाम नहीं था, बल्कि ट्रंप की पर्सनल पॉलिटिक्स का हिस्सा था। रिपोर्ट के शब्दों में, यह टैरिफ उस व्यक्तिगत नाराजगी का नतीजा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति को भारत-पाक विवाद में मध्यस्थता की अनुमति नहीं दी गई। ट्रंप ने कई बार दावा किया था कि उन्होंने दुनिया के कई बड़े संघर्ष खत्म किए और भारत-पाक विवाद को भी सुलझाना चाहते थे। लेकिन भारत ने उन्हें कोई मौका नहीं दिया।

इस साल की शुरुआत में ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया साइट टू्रथ सोशल पर लिखा, मैं भारत और पाकिस्तान, दोनों के साथ काम करूंगा। ताकि कश्मीर पर हजार साल पुराना विवाद खत्म किया जा सके। भारत ने इसे कड़े शब्दों में खारिज कर दिया और अपनी नो थर्ड पार्टी पॉलिसी पर कायम रहा। रिपोर्ट कहती है कि यह बयान भारत के लिए रेड लाइन था और इसे पार करने की कोशिश ने रिश्तों में खटास डाल दी। जेफरीज रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि टैरिफ की एक अहम वजह कृषि क्षेत्र रहा। अमेरिका चाहता था कि भारत अपना कृषि बाजार अमेरिकी आयात के लिए खोले। लेकिन भारत ने अपने किसानों की सुरक्षा को देखते हुए ऐसा करने से इनकार किया।