February 19, 2026

बिहार का रण… कांग्रेस की बढ़ी मुसीबत, साथी दल ही बना रहे दबाव

पटना। बिहार में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। चुनावी संग्राम में प्रेशर पॉलिटिक्स शुरु हो गई है। चुनावी रण में उतरने वाले दल एक- दूसरे पर दबाव बनाकर अपना पलड़ा भारी करने में लगे हुए हैं। इसकी शुरुआत संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के गठन को लेकर हुई है। जेपीसी में शामिल होने के मुद्दे पर इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों ने अब कांग्रेस पर ही दबाव बढ़ा दिया है। समाजवादी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी) जैसे सहयोगी दल जहां इस समिति का बहिष्कार कर रहे हैं, वहीं कांग्रेस जेपीसी में शामिल होना चाह रही है। लेकिन साथी दलों के रवैये से कांग्रेस नेतृत्व दबाव में आ गया है। कांग्रेस के साथी दलों ने कहा है कि इस बिल पर उनका विरोध बहुत मजबूत है और जेपीसी कोई खास बदलाव नहीं करने वाला है।

बता दें कि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के 30 दिन तक हिरासत में रहने के बाद उन्हें पद से हटाने का प्रावधान करने वाले तीन विवादित विधेयकों पर विचार के लिए गठित संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में शामिल होने से कुछ दलों ने इनकार किया है। डीएमके के टीकेएस एलंगोवन ने कहा कि उनकी पार्टी ने बिल के विरोध करने और उसे दर्ज कराने के लिए जेपीसी में शामिल होने का फैसला लिया है। कांग्रेस के एक सांसद ने कहा, हमारे पास यह सोचने के उपयुक्त कारण हैं कि जेपीसी में शामिल होना कैसे उपयोगी हो सकता है। उन्होंने कहा कि हम हर किसी को बीजेपी के खिलाफ एक साथ ले जाना चाहते हैं।

बता दें कि इंडिया गठबंधन में शामिल रही आम आदमी पार्टी ने भी तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी की ही तरह जेपीसी में अपने सदस्य नामित नहीं करने का फैसला किया है। हालांकि, वामपंथी दलों ने अपनी स्थिति अभी स्ष्ट नहीं की है। लेकिन माना जा रहा है कि वह इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ है और जेपीसी में शामिल होना चाहता हैं। कई विपक्षी दलों ने कहा है कि इस मुद्दे पर जेपीसी बेमतलब है। बड़ी बात ये है कि बिहार विधानसभा चुनाव से ऐन पहले इंडिया गठबंधन के अंदर यह रस्साकशी उभरी है। कांग्रेस के लिए दूसरी बड़ी समस्या यह है कि बिहार में उसकी सबसे बड़ी सहयोगी राजद भी अब सपा-टीएमसी और शिवसेना की तरह जेपीसी का बहिष्कार करने की योजना बना रही है। राजद का यह स्टैंड कांग्रेस के स्टैंड से ठीक उलट है। इससे कांग्रेस की मुश्किल और बढ़ती जा रही हंै। हालांकि, डीएमके ने कांग्रेस को राहत दी है और जेपीसी में शामिल होने का फैसला किया है।