भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ यादव ने किया लघु उद्योग भारती के प्रदेश कार्यालय का लोकार्पण
भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उद्योग और रोजगार को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि उद्योगों में काम करने वाली लाड़ली बहनों को सरकार 5 हजार रुपए अतिरिक्त देगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की समृद्धि केवल इंदौर-भोपाल तक सीमित नहीं रहेगी, छोटे जिलों में भी उद्योग बढ़ाए जाएंगे। उन्होंने मॉर्टगेज ड्यूटी, फायर एनओसी और मल्टी-स्टोरी इंडस्ट्रियल प्लांट जैसी समस्याओं के समाधान की भी घोषणा की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव भोपाल के गोविन्दपुरा औद्योगिक परिसर स्थित लघु उद्योग भारती के करीब 4 करोड़ रुपए की लागत से नवनिर्मित प्रदेश कार्यालय भवन के लोकार्पण समारोह में बोल रहे थे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लघु उद्योग भारती के नए ब्रोशर का विमोचन और लघु उद्यमी महाकुंभ-2025 का शुभारंभ भी किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह कार्यवाह कृष्णगोपाल, लघु भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष घनश्याम ओझा, लघु उद्योग भारती के प्रांताध्यक्ष राजेश मिश्रा के अलावा मप्र सरकार के मंत्री विश्वास सारंग, चैतन्य कश्यप और कृष्णा गौर मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि अभी तक लाड़ली बहना योजना में महिलाओं को घर बैठे 1500 रुपए दिए जा रहे हैं। लेकिन हमने तय किया है कि केवल यही पर्याप्त नहीं है। यदि लाड़ली बहना उद्योगों में काम करेगी तो उसे 1500 या 3000 रुपए नहीं, बल्कि 5000 रुपए प्रतिमाह सरकार की ओर से दिए जाएंगे। ताकि वे रोजगार से जुडक़र आत्मनिर्भर बनें। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों में काम करने वाली महिलाओं को सरकार 5 हजार रुपए देगी। अगर उद्योगपति 8 हजार रुपए देंगे, तो महिला श्रमिक को कुल 12 से 13 हजार रुपए मिलेंगे। इससे उन्हें रोजगार के साथ जीवन की परेशानियों से भी राहत मिलेगी। उन्होंने बताया कि रोजगार आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए एमओयू किए जा रहे हैं। 10 से 20 करोड़ रुपए की छोटी इकाइयां लगाई जा सकती हैं, जिनमें 100 से लेकर 7 हजार तक लोगों को काम मिलेगा। सीएम ने कहा कि निमाड़ क्षेत्र में कपड़े बनाने और निर्यात करने वाले उद्योग स्थापित होंगे। यदि कोई उद्योग राज्य के लोगों को रोजगार देगा तो वहां काम करने वाली प्रत्येक महिला श्रमिक को सरकार की ओर से 5 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता दी जाएगी।
घटना हो तो उद्योगपति पर दबाव में केस दर्ज हो जाते हैं
मुख्यमंत्री ने एक पुराने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि जब मैं शिक्षा मंत्री था, तब गुना के पास चीता प्रोजेक्ट का प्रधानमंत्री जी का बड़ा कार्यक्रम था, जिसमें मुझे भी बुलाया गया था। उसी दौरान जानकारी मिली कि नागझिरी की एक इंडस्ट्री में आग लग गई है, जिसमें कुछ श्रमिकों की मौत हो गई। उस समय मेरे सामने चुनौती थी कि प्रधानमंत्री जी के कार्यक्रम में जाऊं या अपनी विधानसभा में जहां दुखद घटना हुई थी। सीएम ने बताया कि उन्होंने तत्काल निर्णय लिया और नेतृत्व को सूचित किया कि वे कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पाएंगे। उन्होंने कहा कि अक्सर ऐसी घटनाओं में दबाव बनाकर उद्योगपति पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर दिया जाता है। हमने कोशिश की कि इसे दुर्घटना की तरह देखा जाए, न कि हत्या का मामला बनाया जाए। इसमें किसी के मन में कोई गलत भावना नहीं होनी चाहिए।
लघु उद्योगों की सुरक्षा जरूरी-डॉ कृष्ण गोपाल
कार्यक्रम में संघ सहकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि लघु उद्योग की सुरक्षा जरूरी है। यह लोगों को रोजगार देते हैं और घर-परिवारों को आबाद बनाए रखते हैं। इनसे समाज के कमजोर वर्ग के लोग रोजगार पाते हैं। यह लघु उद्योग ही देश को चलाते हैं। इस मायने में लघु उद्योग हमारे देश की सामाजिक संरचना के संरक्षक भी हैं। बड़े उद्योगों के सामने बने रहना इनके लिए एक बड़ी चुनौती होती जा रही है। डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि लघु उद्योग सिर्फ भारत देश में नहीं, पूरे विश्व में संकट में हैं। परंतु भारत में फिर भी ये उद्योग जीवित हैं और आगे भी रहेंगे, क्योंकि हम भारतीय अपनी परंपराओं, अपने मूल्यों और अपने लोगों से अंतर्मन से जुड़े हुए हैं। हमें एक बार फिर स्वदेशी भाव से जोडऩा होगा।

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